Sunday, November 14, 2010

क्रिकेट के नीले आकाश में

आज भारत में अगर कोई खेल है तो वह क्रिकेट है ! भीड़ क्रिकेट में, पैसा क्रिकेट में, मनोरंजन क्रिकेट में और सबसे बड़ी बात फिक्सिंग भी क्रिकेट में ! पहले भारत के गाँव, नगर और शहरों में गुल्ली डंडा खेला जाता था , स्कूल के बच्चे, बुजुर्ग भी जब फुर्सत में होते थे गुल्ली-डंडा से सुस्ती भगाते थे ! अंग्रेज क्रिकेट को अपने साथ लाये और १९४७ ई० में स्वयं तो वापिस चले गए लेकिन बौल बैट को यहीं छोड़ गए ! अगर विश्व क्रिकेट के रिकार्ड पर नजर ड़ालें तो आप देखेंगे की सभी रिकार्ड्स होल्डर इंग्लैण्ड से बाहर के ही खिलाड़ी हैं ! बड़े बड़े नामी गरामी क्रिकेटियर वेष्ट इंडीज, (लारा, सोबर्स ), आस्ट्रेलिया, (ब्रेड मैन, उन्हें क्रिकेट का जनक कहा जाय तो भी कम है, ), श्री लंका ( मुरली थरण ८०० विकेट लेने वाला प्रथम बौलर), भारत (सचीन, कपिल, गावस्कर, अनिल कुम्बले) ! ये तो नामी गरामी नाम है जिन्होंने बैटिंग और बौलिंग में नाम कमाया है ! इसके अलावा क्रिकेट जगत में जो भी अंतर्राष्ट्रीय टेस्ट मैच, वन डे मैच या फिर केवल टी २० खेला है वह रातों रात करोडपति बन गया ! सचीन इमानदारी से अपना सालाना आयकर करोड़ों में देता है, उसी तरह गावस्कर, राहुल द्राविड और लक्षमण भी देता होगा ! अब वर्तमान भारतीय क्रिकेट टीम कैप्टेन महेंद्र सिंह धोनी की बात करें ! २००७ तक इनको शायद ही कोई जानता होगा ! द्राविड के कैप्टेन बनते ही उसे विकेट कीपर की पक्की जगह दे दी गयी जिस पर कैप्टेन बनने के बाद भी उसकी पक्की पकड़ है ! बैटिंग में सिक्स्सर लगाने और रनों का अम्बार लगाने पर पाकिस्तान के भूतपूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने इसे बधाई दी थी और उसके पीछे लटके बालों की भी सराहना की थी ! २००७ में पहले उसे टी २० का कैप्टेन बनाया गया, फिर वन डे का फिर फूल फ्लेज्ड भारतीय क्रिकेट टीम का कैप्टेन ! भारतीय क्रिकेट असोसियन विश्व का सबसे धनवान संस्था है ! खुद ही अनुमान लगाया जा सकता है की एक धनवान संस्था के टीम कैप्टेन की इनकम कीतनी होगी ? करोड़ों में या फिर अरबों में ! उसकी अगुवानी में भारतीय क्रिकेट टीम टेस्ट मैचों में विश्व स्तर पर पहली बार प्रथम पायदान पर पहुँची है ! लेकिन पिछले कुछ दिनों से इनकी बैटिंग स्पीड पर काली नजर लग गयी है, उन्हें ये नजर समय रहते झड़वा देनी चाहिए ! वैसे उनकी शादी साक्षी नाम की एक सालीन और सुन्दर लड़की से हुई है और शादी के बाद ही उनके बैट ने रन बटोरने कम कर दिए हैं ! आगे आगे देखिये होता है क्या ? लेकिन कहते हैं भाग्यवान के नक्षत्र जब गर्दीश में होते हैं तो अचानक ही कोई न कोई तारणहार निकल आता है और इसका जीता जागता उदाहरण सामने है, आस्ट्रेलिया के खिलाफ टेष्ट सीरीज जीताने में सचीन का योगदान तथा पुजारा (नया) और लक्षमण (पुराने चावल) की बैटिंग मददगार रही ! आजकल न्यूजी लैंड की टीम भारत आई है ! पहला टेस्ट हरभजन के समझ बूझ और ११५ रनों (पहली टेस्ट सेंचुरी) के कारण न्यूजी लैंड जीती बाजी हार गया ( एक बार तो केवल १५ रनों पर ५ भारतीय टापके खिलाड़ी पैविलियन लौट गए थे ) ! मुरलिथारण ने क्रिकेट से विदा लेते समय कहा था की आने वाले दिनों का हीरो भारतीय स्पिनर हरभजन बनेगा ! न्यूजीलैंड और भारत का दूसरा मैच १२ नवम्बर से शुरू हो गया है, न्यूजीलैंड ३५० और आज चौथे दिन के खेल ख़त्म होने पर २३७/४, भारत की और से हरभजन ने १११ (अविजित) ने फिर दूसरी सेंचरी लगाकर भारत को ४७२ तक पहुंचा दिया है और भारत को १२२ रनों की लीड दिला दी है ! (सहवाग ९६, गंभीर ५४, लक्षमण ७४, आखरी विकेट श्री शांत २४। उसने आखरी विकेट के लिए हरभजन के साथ मिलकर 105 रनों का योगदान देकर एक रिकार्ड कायम करदिया है ) ! लगता हैयह मैच भी बिना रिजल्ट के ड्राव रहेगा !

Tuesday, November 9, 2010

प्यार के अलग अलग रंग

दरिया और सरिता १२ वीं क्लास में साथ साथ पढ़ते थे ! सरिता तो पहले से ही फैजावाद केन्द्रीय विद्यालय में थी और दरिया का पिता सेना में हवलदार थे और उन्हीं दिनों आसाम से पोस्टिंग होकर फेमिली के साथ फैजाबाद आए थे ! क्योंकि दरिया आसाम में भी केन्द्रीय विद्यालय में पढ़ता था इस लिए यहाँ उसे केन्द्रीय विद्यालय में दाखिला आराम से मिल गया ! सरिता के पिता बनवारी लाल बचपन में ही अपने गाँव (हरियाणा) छोड़ कर यहाँ फैजाबाद आ गए थे ! पहले उन्होंने एक व्यापारी के यहाँ नौकरी की ! अपनी योग्यता, लगन, कठीन मेहनत और वफादारी से जिस सेठ के यहाँ वे नौकरी करते थे उन्होंने उसकी लगन, मेहनत और वफादारी से खुश होकर अपनी कंपनी में उसे २५% का हिस्सेदार बना दिया और अपनी लड़की की शादी उसके साथ कर दी ! सेठ जी की एक लड़की और एक लड़का था ! उनके स्वर्गवासी होने के बाद उनके वाणिज्य व्यापार का जिम्मा बनवारी लाल और उनके साले के कन्धों पर पड़ गया था ! सेठ जी अपनी वसीयत में दोनों को आधे आधे का हिस्सेदार बना गए थे ! दोनों ही मेहनती, कर्मठ और ईमानदार थे इसलिए व्यापार में दिन दुगुनी और रात चौगुनी उन्नति होती चली गयी व्यापार फैलता गया ! अब उनकी गिनती फैजाबाद में प्रतिष्ठित इज्जतदार नागरिकों में होने लगी ! कही स्कूल, अनाथालय, लावारिस बच्चों के होस्टलों में वे हर महीने डोनेशन देने लगे थे ! इधर दरिया एक फ़ौजी हवलदार का लड़का था ! उसके दादा भी सेना में हवलदार थे और उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में हिस्सा लिया था बर्मा बौडर पर ! रहने वाला वह भी हरियाणा का ही था, जाति विरादरी के हिसाब से भी दोनों खान दानी थे ! गाँव में जमीन भी थी और खाने के अलावा बेचने के लिए भी अनाज पैदा हो जाता था ! लेकिन आर्थिक दृष्टि से दोनों में जमीन आसमान का अंतर था ! इसलिए दरिया क्लास में अपनी पढाई पर ही विशेष ध्यान देता था, उसके अगल बगल में क्या हो रहा है, उसकी क्लास में कितनी लड़कियां पढ़ती हैं, कैसे लगती हैं, इस ओर उसने कभी ध्यान दिया ही नहीं ! उसने अपने पिता को सेना की ड्यूटी करते हुए देखा था, सुबह चार बजे से लेकर रात के दश बजे तक ! कभी कभी तो पूरी रात ही वे ड्यूटी पर रह जाते थे ! इस तरह कठीण मेहनत से कमाए हुए अपने पिता जी की कमाई से आये पैसों का वहा सही सदपयोग करना चाहता था ! मेहनत करता था और क्लास में प्रथम स्थान पाता था ! उसे तो यह भी पता नहीं था की जो इन्ने गिन्ने लड़कियां उसकी क्लास में पढ़ते हैं उनका नाम क्या है ! उसने सरिता का नाम तो सुना था पर देखा नहीं था ! वह एक अच्छी लड़की थी ! उसने कभी भी सो नहीं किया था की वह एक बड़े व्यापारी की लड़की है ! साधारण कपडे पहिनती थी और केवल अपनी पढाई से मतलब रखती थी ! मेहनत करती थी पर मैथ्स में कमजोर थी ! वह जानती थी की 'दरिया सारे बिषयों में होशियार है लेकिन मैथ्स में तो उसे महारत हासिल है' ! वह दरिया से मैथ्स सीखना चाहती थी लेकिन उसे बात करने की उसकी हिम्मत ही नहीं हुई ! समय निकलता जा रहा था, बोर्ड की परिक्षा की तारीखें नजदीक आ रही थीं ! आखिर हिम्मत करके एक दिन सरिता स्कूल की छुट्टी होने के बाद बाहर बरगद पेड़ के नीचे खड़े हो कर दरिया का इन्तजार करने लगी ! दरिया क्लास से सबसे बाद में निकलता था और सीधे बिना दांये बांये देखे अपने घर की तरफ चल देता था ! जैसे ही वह वरगद के पेड़ के नीचे से निकल रहा था उसे बीच रास्ते में सरिता दिखाई
दी ! दरिया को देखते ही सरिता ने उसका रास्ता रोकते हुए कहा, "माफ़ करना मैंने आज आपको बड़े विश्वास और भरोषे के साथ कुछ जिम्मेदारी देने के लिए रोका है, आशा है आप मेरे भरोषे का मान रखेंगे "! दरिया के पूछने पर उसने उससे मैथ्स सीखने की इच्छा जाहीर की ! दरिया ने उसे मैथ्स सिखाने की हामी भर दी ! दरिया ने उसे कहा की "मैथ्स तो मैं आपको सिखा दूंगा लेकिन कहाँ सिखाउंगा ?" , सरिता ने कहा "मेरे घर पर ! मैंने अपने मम्मी पापा से किसी अच्छे टीचर से मैथ्स सिखाने की इजाजत ले रखी है "! अगले दिन दरिया सरिता के साथ ही उसके घर गया ! सरिता के पापा और मम्मी से मिला ! उसके पापा ने कुछ जबाब सवाल करने के बाद उसे पूछा की वह ट्यूशन के कितने पैसे लेगा ! उसने जबाब दिया, "पढ़ाना मेरा शौक है पैसा कमाना नहीं, सरिता को मैथ्स पढ़ाते पढ़ाते मेरा भी तो रिविजन हो जाएगा "! जबाब सुनकर
बनवारी लाल खुश होगये और उन्होंने उसे सरिता को मैथ्स पढ़ाने की इजाजत दे दी ! इस पढ़ने पढ़ाने के दौरान कब इन दोनों की नजरें चार हुई और अन्दर ही अन्दर दिल के अन्दर कब प्रेम का पौधा अंकुरित हो गया दोनों को पता भी नहीं चला ! लेकिन विडम्बना तो देखिये, दिल की बात कभी इन दोनों की जवान पर नहीं आई ! वैसे भी दोनों की आर्थिक विषमताएं दोनों के दिल की आवाज दबा रही थी ! सरिता अपने मम्मी पापा से बाहर नहीं जा सकती थी, दरिया के पास पैसा नहीं था और वह किसी का मोहताज बनना नहीं चाहता था ! दोनों ही एक दूसरे को जीवन साथी बनाना तो चाहते थे लेकिन बात मन की मन में रह गयी और समय की गाडी बहुत आगे निकल गयी ! बोर्ड की परीक्षा भी हो गयी दोनों पास भी हो गए और आगे कालेज में दोनों की दिशाएं भी बदल गयी ! समय बहुत तेजी से निकलता चला गया ! सरिता के लिए अच्छे अच्छे रिश्ते आने लगे, लेकिन या तो परिवार ठीक नहीं मिला या लड़का सरिता के जोड़ का नहीं मिला ! सरिता के पापा ने एक दो बार दरिया के बारे में सोचा भी कि "दरिया एक सुन्दर कद काठी का मेहनतकस नव जवान है और सरिता के लिए योग्य भी है लेकिन गरीब है, एक मामूली सैनिक के लडके के हाथों अपनी फूलों की सेज में पली लाडली लड़की का हाथ दे देना कोई अकलबंदी नहीं है" ! उधर दरिया ने भी कालेज से निकलने के बाद अपने परिवार की परंपरा को आगे बढाते हुए आर्मी ज्वाइन करदी लेफ्टिनेंट की रैंक से ! पहली पोस्टिंग जम्मू काश्मीर में हुई कैप्टेन की रैंक के साथ ! वहां आतंकवादियों के एक भारी खतरनाक दल का सफाया करने के एवज में दरिया को केवल डेढ़ साल की सर्विस में ही पीस टाईम का दूसरे नंबर का मेडल 'कीर्ति चक्रा' भारत के राष्ट्रपति के हाथों से लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ ! देश के प्रमुख अखबारों के प्रथम पृष्ट पर उसकी फोटो के साथ उसकी बहादुरी के कारनामें उजागर किए गए थे ! राष्ट्रपति से मेडल लेते हुए उसकी सुन्दर तस्वीर भी अलग से छपी थी ! अखबार सरिता के ममी पापा ने भी देखा और सरिता ने भी ! फोटो देखते ही वे उसे पहिचान भी गए ! सरिता के लिए लड़का ढूंढते वक्त उन्हें उसकी याद नहीं आई क्योंकि उस समय तक वह उनकी बराबरी का नहीं था ! आज वही दरिया एक सेना का बहादूर अफसर 'कृति चक्रा ' से सम्मानित की वर्दी में उन्हें अपना दामाद नजर आने लगा ! सरिता को बिना कहे ही मन की मुराद मिल गयी, ईश्वर ने उसके दिल की पुकार सुन ली ! बनवारी लाल ने फ़ौरन अखबारों में छपे टेलेफोन पर दरिया के पिता से संपर्क किया और दरिया और सरिता का रिश्ता पक्का कर दिया गया ! इस तरह बिना ओंठ हिलाए ही दोनों की
मन की मुराद पूरी हो गयी, दोनों की शादी बड़े धूम धाम की गयी ! ये हैं प्यार के अलग अलग रंग !

Monday, November 8, 2010

आज तक क्या देखा और क्या सुना

आज ८ नवम्बर २०१० है ! इस बीच बहुत कुछ घट गया ! विश्व के नक़्शे पर नजर डालने पर पता चलता है कि ये दुनिया तो मिनिट मिनिट पर बदलती जा रही है ! कामनवेल्थ गेम आखीर भारत में हो ही गए ! सरकार ने दिल खोल कर आयोजकों को धन दिया कामनवेल्थ गेमों को सफल बनाने के लिए, आयोजकों ने भी बड़ी इमानदारी से ६५% अपनी जेबों में डाल कर बाकी के ३५ % लगा दिए, कुछ पुल गिर गए, कुछ मजदूर मर गए या घायल हो गए ! आम आदमी की जेब पहले भी खाली होती थी अब ७० हजार करोड़ की भरपाई के लिए सरकार ने मंहगाई बढ़ा दी ! ऊपर जनता के दबाव में आकर आयोजकों के ऊपर इन्क्वारी बिठा दी, इस पर भी तो पैसा लगेगा, इस से होने वाला तो कुछ नहीं है, जब पहले के घोटाला उजागर होने पर भी कुछ नहीं हुआ तो अब क्या होगा ! जनता तो बेचारी गऊ है गऊ भूखी प्यासी भी रहेगी फिर भी दूध देगी !
हमारे प्रधान मंत्री अभी हाल ही में चीन गए थे ! वहां के प्रधान मंत्री के साथ वार्ताएं चली ! सीमा पर जो विवाद उठा है, अरुणाचल प्रदेश पर भी चर्चा हुई, सन ६२ ई० में चीन ने जो भारतीय इलाका अपने कब्जे में कर लिया था शायद उस पर भी बात हुई होगी, नतीजा क्या निकला ? प्रधान मंत्री श्री मन मोहन सिंह खुद मानते हैं कि "चीन पर इतवार नहीं पर ६२ जैसा जंग नामुमकिन" ! यह तो पहले से ही पता था फिर चीन यात्रा की क्या जरूरत थी ?
अमेरिकी राष्ट्रपति भारत में
अमेरिका के प्रथम अश्वेत राष्ट्रपति श्री बराक ओबामा आज कल भारत की यात्रा पर हैं ! पहले वे मुम्बई में उतरे, वहां हवाई अड्डे पर महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति को एक ऐसी पुस्तक भेंट की जिसको वे अमेरिका के राष्ट्रपति भवन में सुरक्षित रखेंगे ! मुख्य मंत्री श्री अशोक चव्हाण जी ने यह पुस्तक उन्हें महाराष्ट्र की याद दिलाने के लिए दी है, भारत की याद दिलाने के लिए नहीं ! वैसे ओबामा का हवाई अड्डे पर उतरते ही भव्य स्वागत किया गया ! तथा पूरी मुम्बई में उनका स्वागत हुआ ! स्वागत समारोह एक स्कूल में हुआ था जहां बच्चों ने रंगा रंग प्रोग्राम में राष्ट्रपति ओबामा और उनकी पत्नी को भी डांस में शामिल कर दिया ! नन्ने नन्ने मासूम बच्चों ने जब विश्व के इस महान हस्ती को अपने साथ डांस करते पाया तो वे बहुत ही प्रशन्न हुए साथ ही बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ने भी इन मासूम बच्चों के बीच आकर मुम्बई के लोगों के दिलों में एक विशेष जगह बना दी एक अमिट छाप छोड़ दी ! कालेज के विद्यार्थियों से भी वे मिले और उनके सवालों के जबाब भी उन्होंने दिया ! दिल्ली आकर वे प्रधान मंत्री से मिले, संसद के दोनों सदनों को उन्होंने सम्भोधित किया ! जब उन्होंने हिन्दी में धन्यवाद कहा तो सारे सांसदों ने डेस्क बजाकर अपनी खुशी जाहीर की ! चाहे हमारे प्रधान मंत्री ने कभी एक भी शब्द हिन्दी में न बोला हो लेकिन डेस्क तो उन्होंने भी थप थपाई ! भारत को अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा से काफी अपेक्षाएं हैं ! उन्होंने विश्वास दिलाया है कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत का समर्थन करेगा ! भारत आज विश्व की एक उभरती हुई शक्ती है और अमेरिका - भारत की दोस्ती इस सदी की जरूरत है ! राष्ट्रपति और उनकी पत्नी भारत की सभ्यता, संस्कृति,
यहाँ की परम्पराएं, यहाँ की ऐतिहासिक सम्पदा से बहुत प्रभावित हुए हैं ! भारत के वैज्ञानिकों का वे बड़ा आदर करते हैं, उन्होंने कहा कि शून्य की खोज भारत ने की, सुपर कंप्यूटर भारतीयों ने बनाया ! किंग मार्टिन लूथर महात्मा गांघी के अहिंसा आन्दोलन के समर्थक थे ! भारत एक धर्म निरपेक्ष लोकतांत्रिक देश है, निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की ताकत है ! उन्होंने ने माना है कि पाकिस्तान के अन्दर आतंक वाद फल फूल रहा है ! और इसी आतंकवाद को समाप्त करने के लिए अमेरिका पाकिस्तान को आर्थिक सहायता दे रहा है ! पाकिस्तान के अन्दर आतंकी ठिकाने अमेरिका को मंजूर नहीं है, मुम्बई के हमलावरों को सजा मिलेगी ! उन्होंने विश्वास जताया है कि हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के संबंधन आपसी बातचीत से सुलझ जाएंगे ! साथ ही काश्मीरके बारे में उन्होंने कहा कि अमेरिका काश्मीर के मामले में दखलंदाजी नहीं करेगा ! हाँ अगर भारत - पाकिस्तान चाहेगा तो अमेरिका इस समस्या को सुलझाने में मदद कर सकता है !
भारत भी तो अमेरिका से कुछ चाहता है , यह - १बी और एल -१ बीजा शुल्क में कमी ! भारत की ऐ टी कंपनियों पर अमेरिका में लगी पावंदी हटाई जाय ! भारत के प्रधान मंत्री ने साफ़ कह दिया है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत और आतंकवाद साथ साथ नहीं चल सकता ! अभी भारत के प्रधान मंत्री मन मोहनसिंह और अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा के बीच वार्ता चल रही है ! जैसे ओबामा से पिछले अमेरिका के राष्ट्रपति क्लींटन ने यहाँ राजस्थान में यहाँ के लोगों पर अपने करिश्मा का जादू चलाया था ठीक वही करिश्मा ओबामा ने मुम्बई में बच्चों के बीच डांस करके दिखा दिया ! वैसे विशेषज्ञों का कहना है कि ओबामा भारत में अमेरिकियों के लिए नौकरी तलाशने के लिए आए हैं, वे यहाँ बिलियन डॉलर इन्वेस्ट करने जा रहे हैं ! जो भी होगा अच्छा ही होगा ! वैसे खुद अमेरिका में अमेरिका के न्यू डायनेमिक राष्ट्रपति बराक ओबामा का करिश्मा की सुई नीचे गिरने लग गयी है, उनकी पार्टी (डेमोक्रेटिव) प्रतिनिधि सभा (हॉउस ऑफ रिप्रेसेंटेटिव} में अल्पमत में आ गयी है और अभी उन्हें राष्ट्रपति की कुर्सी पर बैठे हुए दो साल भी पूरे नहीं हुए हैं !
टेस्ट क्रिकेट
आजकल न्यूजी लैंड की क्रिकेट टीम भारत आई हुई है ! पहला टेस्ट मैच जो ४ नवम्बर से ८ नवम्बर तक चला ड्राव रहा ! भारत ४८७+२६६ ( सहवाग १७३ + १, द्रविड़ १०४ +१, सचिन ४०+१२, लक्षमण ४०+९१, हरभजन ६९+११५ (पहला शतक), न्यूजीलैंड ४५९+२२/१ > रैना और धोनी सस्ते में निपट गए ! आज तक की खबरें ख़तम हुई !

Thursday, November 4, 2010

जिन्दगी को संवारने के लिए

हमारा यह शरीर पंच तत्व का है ! ईश्वर एक सुन्दर सी आकृति रूप में बच्चे को माँ बाप के आँगन में उतार देता है साथ ही उस बच्चे की देख रेख की भी जिम्मेदारी उनके कन्धों में डाल देता है ! अब माँ बाप जैसे माहौल में होंगे उसी तरीके से बच्चे की देख रेख, लालन पालन वे अपनी हैसियत से करते हैं ! यहाँ तक बच्चा अपने पिछले कर्म और संसकारों के सहारे पंहुचता है, अगर अच्छे कर्म थे तो किसी ऊंच्चे खानदान में, किसी ईश्वर भक्त के आँगन में, किसी सरस्वती की उपासना करने वाले सज्जन के घर में जन्म लेता है, नहीं तो किसी गरीब की झोपडी या किसी मजदूर की तपस्या से कमाई हुई पूंजी के तौर पर गुदड़ी का लाल बनकर उनके अतृप्त मन को तृप्त करने के लिए उनके घर का चिराग बन जाता है ! जब तक बच्चा होश संभालता है तब तक माँ बाप उसकी हर हरकत पर नजर रखते हैं ! उसके खान पान, रहन सहन और बोल चाल पर उसके माँ बाप की शिक्षा, सभ्यता और संस्कारों का असर पड़ता है ! ज्यों ज्यों वह बड़ा होता जाता है पास पडोस के बच्चों की संगत करता है, स्कूल जाता है वहां विभिन्न संस्कार और परस्थितियों से जूझते माँ बाप के बच्चे पढ़ते हैं, जिस बच्चे के विचारों से उसके विचार मेल खाते हैं, उस से उसकी दोस्ती हो जाती है ! अगर वह बच्चा संस्कारिक है, अच्छी सभ्यता वाला, अच्छी भाषा बोलने वाला है तो ये गुण उसके खान पान रहन सहन पर भी असर डालते हैं ! खान पान में पांच तत्वों की पूर्ती होती रहती है, इसी हिसाब से दिमाग बढ़ता है, शरीर बढ़ता है, पांच ज्ञान इन्द्रियाँ और पांच कर्म इन्द्रियों का विकास होने लगता है ! अगर माँ बाप का आँगन जो बच्चे की जिन्दगी की पहली सीढी है वही विकृत है, घर का माहौल ही दूषित है तो बच्चे का विकास भी वैसे ही होगा ! यहाँ पर सवाल उठता है की क्या बच्चे के संस्कार, खान पान पर और भाषा पर माँ बाप के गरीबी और अमीरी का असर पड़ता है ? अमीरी और गरीबी का असर तो बच्चे के खान पान रहन सहन, पहनावा और वातावरण पर पड़ता है लेकिन बुद्धी के विकास में अमीरी गरीबी आड़े नहीं आती ! माँ बाप गरीब हैं और अच्छे संस्कार और भाषा वाले हैं, महत्वाकांक्षी हैं, बच्चों के भविष्य के प्रति सजग हैं और लगनशील हैं उनके बच्चे झोपड़ियों से निकल कर बंगलों में पहुँच जाते हैं ! हाल ही में दो मजदूरों के बच्चे एक
ऐ ए एस में निकला है तो दूसरा ऐ ऐ टी के लिए क्वालीफाई कर गया है ! यह तो जीता जगता उदाहरण है ! फिर सभी अम्मीरों और नौकरसाहों के बच्चे ऊँची डिग्री नहीं ले पाते जो गरीबों के बच्चे ले जाते हैं ! हाँ राज नीति ही एक ऐसा स्थान है जहां सारी सीटें नेताओं और नौकरशाहों के लिए आरक्षित हैं !
अब रही इस पंच तत्व रूपी शरीर को संवारने की बात तो हर इंसान को जब वह स्वावलंबी हो जाता है तो उसे अपने शरीर का ध्यान स्वयं ही करना पड़ता है ! आज के इस मशीनी युग में जब इंसान भी खुद मशीन बन गया है, जिस शरीर को पुष्ट करने के लिए वह कमाने के लिए भाग दौड़ कर रहा है उसके बारे में सोचने का तो उसे कभी मौका ही नहीं मिलता ! आइए इस बारे में बात करें की हमारे इर्द गिर्द बिखरी हुई छोटी छोटी वस्तुएं, छोटी छोटी जानकारियाँ हमारी जिन्दगी को संवार सकती हैं ! सुबह उठते ही अपने हाथ देखिए, ठंडियों में हल्का सा गर्म पानी और गर्मियों में ठंडा पानी मुंह में भर दीजिये, ठन्डे पानी से आँखों में छूमा दीजिए तब तक, जब तक आँखों में मिर्च न लग जाँय ! फिर मुंह के पानी को नाक के द्वारा बाहर निकाल दीजिए ! इससे एक तो आँखों की रोशनी बनी रहती है चश्मे की जरूरत नहीं पड़ती, नाक का और गले का टेम्प्रेचर सम रहने से जुकाम लगने के चान्स्यज कम हो जाते हैं ! शाम को सोते हुए हलके गर्म दूध में एक चुटकी हल्दी डाल कर पी जाँय ! इससे पेट में पलने वाले परजीवी कीड़े ख़त्म हो जाते हैं ! ताली बजाने से शरीर के अन्दर के तमाम हिस्सों गुर्दे, फेफड़े, दिल, आंतें (छोटी बड़ी), गला, कान, आँखें, नाक, पेनक्रीज, थायराइड, लीवर को प्रेसर मिलता है ! शरीर को वार्म अप करने के लिए हल्का सा व्यायाम जरूरी है ! प्राणायाम जैसे अग्निसार, कपालभाती, अनुलोम -विलोम, उजई, भामरी, नाडी शोधन आदि ! इससे शरीर दिन भर चुस्त और प्रश्न्चित रहता है ! प्रसालन में परेशानी हो रही हो तो सुबह उठते ही दो गिलास गुनगुना पानी पीकर सौ दो सौ कदम चलिए, त्रिकोण आसन पांच बार बाएं और पांच बार दाहिने झुकिए ! अगर वायु की शिकायत है तो सुबह खाली पेट एक लहसुन छील कर साबुत पानी के साथ निगल जाँय ! मुंह का स्वाद ठीक नहीं है तो लंच या डिनर से दश मिनट पहले एक छोटा सा टुकड़ा अदरक का नमक मिलाकर चूस लें ! मुंह का स्वाद ठीक हो जाएगा और खाने में स्वाद आएगा ! इस तरह ईश्वर की दी गयी इस अमूल्य जिन्दगी को हम संवार सकते हैं और जितनी साँसे उस परम पिता ने हमें दे रखी हैं उनका आनंद ले सकते हैं !

Wednesday, November 3, 2010

एक नया सूरज निकलेगा

पुराना साल जाता है नया आता है, एक उत्साह, एक उमंग एक नया स्वप्न जहन में उतर आता है ! इसी तरह बीते दिन की खट्टी मीठी यादों को संजोकर नए दिन का इंतज़ार रहता है ! हर कोई उगते सूरज को नतमस्तक होकर नमस्कार करता है, लेकिन शाम को जब वही सूरज पश्चिम दिशा में अपनी लालिमा बिखेरते हुए अपनी अंतिम यात्रा की सूचना देता है तो कोई बिरले ही उनके दर्शन करता है ! जो दर्शन करते भी हैं वे शाम का नजारा देखना चाहते हैं की सूरज जब अस्ताचल को जाने लगता है तो कैसे लगता है ? कुछ सैलानी सूरज की अंतिम यात्रा में कुदरत के अद्भूत रंग देखते हैं कुछ ऐसी भी दिल वाले होते हैं जो सूर्यास्त की सीनरी को अपने बैठक की दीवार पर लगा कर बैठक की शोभा बढाते हैं !
आज मैं सुबह सुबह पूरब दिशा में खुलने वाली अपने घर की खिड़की के पास बैठकर उगते सूरज के दर्शन कर रहा था ! जहां पर सूरज उगने वाले थे वहा कुछ दूर तक काले बादलों की परतें जमा थी ! धीरे धीरे सूरज की किरणे बिखरती गयी और ये बादलों के टूकडे किरणों के प्रभाव में स्वरूप बदलते गए ! मैं एक टक से पूरी एकाग्रता से बादलों के पल पल में बदलते हुए रूप रंग देखता रहा ! पहले लगा की मेरे सामने एक विशाल पर्वत खडा है, उस पर्वत के आगे खेत हैं, कहीं कहीं पर बड़ी बड़ी झीलें झीलों में खिले हुए कमल के फूल, विचरण करने वाली बतखें, खेत धान की पक्की हुई फसलों से भरी हुई, उनके बीच से निकलता हुआ रास्ता जो पहाड़ की चोटी तक चला गया है ! पहाड़ के पीछे से एक नदी बहती हुई, पर्वत शिखर से झरना बन कर गिरती है और इन खेतों की मीढों से टकराती हुई आगे विशाल झील में मिल जाती है ! इस नदी के किनारे कही प्रकार के पेड़ पौधे कही रंगों में दिखाई दे रहे हैं ! जैसे जैसे सूरज का रथ आगे बढ़ता है वैसे ही इन बादलों का स्वरूप भी बदलता जाता है ! धान के विशाल खेत धीरे धीरे सूखे घास में बदल जाते हैं ! झीलें धीरे धीरे सिकुड़ती हुई सूखती जा रही हैं ! उगते हुए सूरज की चढ़ती हुई किरणें काले बादलों को छितर बित्तर करती हुई चारों और फैलती जा रही हैं ! सूरज पूरी तरह निकल आये हैं और बादल जो उनके रथ के आगे दुष्टों की तरह जाल बिछाते जा रहे थे दूम दबाकर भागते नजर आ रहे हैं जैसे सच्चाई के आगे झूठ फ़िका पड़ जाता है, जैसे सज्जनों के आगे दुष्ट ज्यादा देर नहीं टिक पाते ठीक वैसे ही आज के भ्रष्टाचारी, जालिम, दुष्ट, अत्याचारी, हत्यारे और झूठे सूरज की तेज किरणों में जल कर राख हो जाएंगे ! भारत भूमि में भी एक दिन एक ऐसे ही सूरज निकलेगा जिसकी तेज किरणों के आगे ये तमाम भ्रष्टाचारी,
रिश्वत खोर, जमाखोर, देश द्रोही, गद्दार, आतंकवादी, हत्यारे, झूठे, सब्ज बाजार दिखाने वाले आयाराम गया राम नेता इन काले बादलों की तरह बिखर जाएंगे ! इसी आशा और विश्वास के साथ भारत माता की धुल धूसरित करोड़ों किसान, सैनिक, मजदूर, मासूम बच्चे, महिलाएं जी रहें हैं और इन्तजार कर रहे हैं उस भगवान कृष्ण की जिन्होंने स्वयं अपने मुंह से कहा था "यदा यदा हि धर्मंस्य ग्लानिर्भ व् ति भारता, अभ्युत्थानम धर्मस्य तदाअत्मानं सृजाम्यहम !!

Sunday, October 31, 2010

हाय काश्मीर

काश्मीर कभी थी दिल की धड़कन,
सुन्दर पर्वत घंने थे वन,
नदियों का मन-मोहक संगम,
फिरता भंवरा रूपी मन,
चिनार के पेड़, फूलों की घाटी,
सुगंध भरी यहाँ की थी माटी,
बाग़ बगीचे सुन्दर झीलें,
सारस बत्तखें रंग रंगीले,
फलों की रहती सदा बहार,
सेबों के थे कही प्रकार,
कुदरत डाली डाली पर,
धान की हर बाली पर,
खुशबू से भर जाती घाटी,
सुरबाला जल भरने आती !
सुबह सुबह सूरज की किरणे,
आके अलख जगाती,
छोटी छोटी चिड़ियाँ आकर,
मधुर संगीत सुनाती !
लोगों में था प्यार मोहब्बत
हिल मिल कर सब रहते थे,
हम भारती भारत हमारा,
सभी काश्मीरी कहते थे !
एक दिन एक राक्षस आया,
आतंकवाद को साथ में लाया,
बाग़ उजाड़े, मासूम मारे,
घाटी हो गयी विरान,
हत्यारे दुष्टों के डर से,
भागे संत बचाके जान !
अब तो जल रहा काश्मीर,
जल गयी सुन्दर तस्वीर,
हर रोज इस ज्वाला में
शहीद हो रहे सैनिक वीर !!

Wednesday, October 27, 2010

उसकी शर्ट मेरी शर्ट से सफ़ेद क्यों है ?

हम हमेशा दूसरों की साफ़ सफाई, उनकी उन्नति और विकास की तारीफ़ करते रहते हैं ! दूसरे की सफ़ेद शर्ट अपनी शर्ट से अच्छी लगती है, क्यों लगती है, इस विषय पर विचार करने का समय नहीं है ! एक तरफ हमारा इतिहास कहता है की भारतीय संस्कृति, सभ्यता और विकास विश्व के अन्य देशों से पहले का हैं दूसरी ओर हम दूसरोंके मुकाबले अपने को अभी भी अन्य विक्सित देशों से पिछड़ा हुआ समझते हैं ! आज अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्रांस, चीन, जापान, जर्मनी अपनी मेहनत से ऊंचाइयां नापते चले जा रहे हैं वहीं हमारे नेता जनता का पैसा बटोर कर विदेशी बैंकों में जमा करने में लगे हैं और दावा करते हैं की २०२० तक हम विश्व के नंबर वन होंगे ! अमेरिका का इतिहास बताता है की सन १८५० ई० तक अमेरिका के उत्तर पश्चिम पहाडी इलाके के लोग (जिन्हें यहाँ के लेखक, पत्रकार, उपन्यास कार इतिहास कार इन्डियन अमेरिकन मूल निवासी बताते हैं ) छोटे छोटे कब्बीलों में रहते थे ! रोलैंड समीति अपने उपन्यास "कैप्टेन'स डाग" में लिखते हैं कि अमेरिका के राष्ट्रपति जफ्फर्सन ने अपने दो सेना के अधिकारियों को इन इलाकों में भेजा वहां के इलाकों का नक्शा बनवाने, वहां की जन जातियों से संपर्क करने के लिए ! उन में से एक का नाम था कैप्टेन लेविस और दूसरे का नाम था क्लार्क ! लेविस के साथ एक कुता है जिसके माध्यम से यह उपन्यास लिखा गया है साथ ही इनके साथ दश बारह लोग भी इनके सामान, राशन ले जाने और इनकी मदद के लिए साथ थे अमेरिका के उत्तरी पश्चिमी इलाके
के तमाम प्रदेश, उटाह, न्यू हेम्फाशायर, मेसाच्युट, वरमोंट, अलास्का, अरिजोना,नेवादा, केलिफोर्निया आदि प्रदेशों में रहने वाले कब्बायली अलग अलग फिरकों में बँटे हुए थे, जंगली जानवरों को मार कर खाते थे और उनकी खाल ओढ़ते थे ! खेती के नाम केवल मकई की खेती करते थे ! कुत्ते और घोड़े पालते थे और जरूरत पड़ने पर उन्हीं को मार कर उनका मांस खा जाते थे ! शिकार करने के लिए उन लोगों के पास धनुष वाण होते थे जो छोटे छोटे जानवरों को मारने में सक्षम होते थे ! चाकू छूरी ही इनके हथियार थे ! ये जन जातियां अचानक एक दूसरे के ऊपर आक्रमण कर देते थे, आदमियों बच्चों को मार देते थे और लड़कियों और जवान औरतों के साथ साथ उनका राशन और घोड़े भी ले जाते थे ! ये जन जातियां अपने अपने जातियों के गाँव बसाकर झोपड़ियां बनाकर रहते थे ! कैप्टेन लेविस इलाकों में पाए जाने वाले जानवरों और पशु पक्षियों के नमूने इकट्ठे करते थे, वहां के लोगों के रहन सहन सहन, खान पान, और इलाके में पड़ने वाले जंगल, पहाड़, नदियाँ, झरने, मिट्टी किस किस्म की है, समुद्र से दूरी, आवागमन के साधन आदि जानकारियों का दस्तावेज तैयार करता था और कैप्टेन क्लार्क इलाकों का नक्शा बनाता था ! नदी, झरने, पहाड़ों के नाम उसी समय रखे गए थे जैसे एक नदी का नाम जैफ्फर्सन रिवर उसी समय पड़ा ! वहां के लोग इतने भूखे थे की एक घटना के मुताबिक़ कैप्टेन क्लार्क ने बन्दूक से एक हिरन मारा, हिरन पूरा मरा भी नहीं होगा की तमाम आस पास वाले स्थानीय जन जाति के लोग उस हिरन पर भूखे शेर की तरह टूट पड़े और एक घंटे के अन्दर कच्चा ही सारे हिरन को हजम कर गए ! जब कुछ नहीं मिलता तो जंगल में एक विशेष प्रकार बेल की जड़ें भी खा लिया करते थे ! स्थानीय कब्बायली (ब्लेक फूट) रात के समय इनके कैम्पों में आकर लूट पाट कर जाते थे लेकिन बन्दूक से बहुत डरते थे ! उन दिनों इन अमेरिकनों के पास बारूद से भरने वाली बंदूकें होती थी ! जानवरों और पक्षियों के ताल मेल पर लेखक लिखता है की इस खोजी टीम को बार बार एक कौवा दिखाई देता था जो पूरा काला होते हुए भी उसके दो तीन पंख सफ़ेद थे, वह जब किसी हिंसक पशु, जैसे शेर, बाघ, भालू को कहीं नजदीक देखता था तो काव काव करके सबको सचेत कर देता था ! कुछ क्ब्बायली बड़े मददगार और विश्वनीय भी थे ! इन जन जातियों से मेल मिलाप करने के लिए वे एक फ्रांसिसी और उसकी जन जाति बी बी को साथ ले गए थे जिसने इन लोगों और कब्बायालियों के बीच में बात करवाई और इंटर प्रेटर का काम किया ! कुछ उन दिनों की जन जातियों के नाम इस प्रकार हैं, (इलाका मिसौरी रिवर से मानदं इन्डियन) नेज़ पर्श, फ्लेट हेड, यांकतों सिओक्ष, सिओक्ष, टेटन सिओक्ष, ब्लेक फिट इन्डियन (चोर), चिनोक इंडियन !
इन लोगों ने पैसिफिक सागर और अटलांटिक सागर के साथ वाले इलाकों में पूरा सर्वे किया ! उस समय इलाके में मिलने वाले जीव जन्तु थे, भालू, भेड़िया, हिरन, बाराहशिन्घा जंगली बकरा, भैंसा, खरगोश, गिलहरी, चिड़ियाएँ ! पहाड़ों की चदाई बड़ी कठीन थी ! जून जौलाय में भी पहाड़ बर्फ से ढके रहते थे ! इन लोगों ने ४१४२ मील की यात्रा की और पूरे ३ साल इन इलाकों में गुजारे ! एक कैम्प का नाम तो इन लोगों ने स्थानीय जन जाति के नाम पर रख दिया "क्लैट्साप इंडियंस " । आज डेढ़ सौ सालों में इन सारे प्रदेशों में जा कर देखने से पता लगता है विकास क्या होता है? मेहनत किसको कहते हैं ? जनता से टैक्स लिया जाता है तो वह पैसा इलाके के विकास पर ही खर्च किया जाता है ! सारे जन जाति अगर गाँवों में रहते हैं तो जमींदार बन कर जहां आधुनिकता की सारी सुविधाएं मौजूद हैं ! बाकी बहुत से नगरों और शहरों में इज्जत से रह रहे हैं ! जब हमारे हाथों में भी यह जादू की छडी आजाएगी , हम भी ऐसा ही करने लगेंगे और फिर हमें यह नहीं कहना पडेगा की उसकी शर्ट मेरी शर्ट से सफ़ेद क्यों है ?