Thursday, November 18, 2010

जिन्दगी के ७५ बसंत

हाँ आज मैंने अपनी जिन्दगी के ७५ बसंत पूरे कर लिए हैं और ७६ वीं सीढ़ी में कदम रख दिए ! २००३ ई० में मैं इन दिनों उटाह (अमेरिका) में था ! उसके बाद २००६ से २०१० तक मैं अपना जन्म दिन अमरीका में ही मनाता आ
रहा हूँ ! यहाँ मेरा सबसे छोटा पोता है वेदान्त, मैं उसके साथ बच्चा बन जाता हूँ ! आत्रेय सात साल का हो गया है, लेकिन दादा के साथ उसका भी लगाव ज्यादा ही है ! इस तरह दोनों बच्चों के साथ अपना जन्म दिन मनाने का आनंद ही और है !आज सुबह उठ कर परमपिता परमात्मा को नमस्कार किया, स्नान करके पूजा की, योगा प्रायाम करके २ मील की सैर करने कालोनी के पूरब दक्षिण में एक छोटी सी पहाडी है, उसके ऊपर खड़े होकर सूरज की प्रथम सुनहरी किरणों के नज़ारे देखे, फिर बच्चों के बीच हंसते खेलते हुए उन्हें स्कूल भेजा ! काजल और मेरी पत्नी ने मुझे जन्म दिन पर बधाई दी और गर्म गर्म मीठे हलवा खिला कर मीठे मूंह से दिन की शुरुआत हो गयी ! कम्यूटर पर मेल देखी, कही दोस्तों, साथियों और भारत से बच्चों की मेल देखी सब मेरे जन्म दिन की बधाई के थे !
दिल्ली से मेरी पोती आर्शिया और पोता अरनव ने भी मुझे जन्म दिन की वधाई दी अपनी तूतली बोली में (वह अभी एक साल और ९ महीने का है ) ! पटपडगंज दिल्ली से लड़की का तथा मेरी ध्योती नीतिका ने भी फोन पर अपना सन्देश दिया ! राजेश इस समय बंगलौर में है एक जरूरी मीटिंग के लिए, उसने भी फोन करके जन्म दिन की बधाई दी इसी तरह ब्रिजेश और बिन्दू भी पीछे नहीं रहे ! फिर दोस्तों के फोन आने शुरू हुए, कुछ पूछते थे "रावत जी अब कितने साल के हो गए "? और मैं गर्व से कहता की "अनुमान लगाओ," *७०, ८० ", ७० तक तो मैं मुस्कराता रहता लेकिन जब ८० कहते तो मैं आपा खो देता, "कमाल करते हैं आप, अभी बहुत सारे बच्चे मुझे अंकल कह कर पुकारत्ते हैं और आप मुझे ८० का बताते हैं ", वे कहते
"रावत जी माफ़ करना, आपका कसरती शरीर देखकर तथा बालों से आप ६५ के लगते हैं लेकिन चहरे की झुरियां हमें चक्कर में डाल देती हैं यकीन मानो आपके शरीर की लचक और स्फूर्ति देखकर कोई आपको ६०-६५ से से ऊपर का नहीं कह सकता और मेरे मन में खुशियों की फूल झड़ियां झड़ने लगती ! शाम तक बच्चे स्कूल से वापिस आजाते हैं फिर हो जाती बचों के साथ लुका छिपी, कबड्डी कबड्डी, दौड़ भाग ! एक सजन ने मुझे पूछा "रावत जी आप इस उम्र में भी इतनी दौड़ भाग वह भी बच्चों के साथ कैसे करलेते हैं " ? मैं जबाब देता हूँ, सुबह सुबह उठ कर स्नान ध्यान, योग, कसरत, प्राणायाम और सूरज निकलने के साथ ही २ मील की सैर ये सब मेरे दैनिक कार्य कर्म में सामिल है !
मैं यहाँ ६ दिसंबर तक हूँ फिर इंडिया चला जाउंगा और वहां भी यह नियम इसी तरह पालन किया जाएगा ! यहाँ के लोगों के पास पैसा है, सजा सजाया शानदार मकान है, महंगी कार हैं, दिमाग है, वह सब कुछ है जिसको हम भौतिक सुख कहते हैं, लेकिन मन की शांती नहीं है , जिस्मानी स्थिरता नहीं है ! जवानी पैसा कमाने और भाग दौड़ में बीत जाता है और बुढापा बीमारियों के बोझ तले बीतता है ! मैं योग गुरु बाबा रामदेव के बताए हुए वसूलों का पालन करता हूँ , दिमाग को चिंता मुक्त रखता हूँ ! आप भी इस विधि को अपनाइए !

Sunday, November 14, 2010

भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारी

सदियों पहले लोक नायक जय प्रकाश नारायण ने चम्बल के डाकुओं को शांती सन्देश देकर उन्हें अपने हथियारों सहित समर्पण करने का अनुरोध किया था और प्रदेश व केन्द्रीय सरकार को समर्पण करने वाले डाकुओं को अमन चैन की जिन्दगी जीने के लिए, समाज की मुख्या धारा से जुड़ने के लिए ग्राम, जिला स्तर पर स्कीम बनाने की प्रार्थना की थी ! लोक नायक के अनुरोध को स्वीकार करते हुए उस समय के नामी ग्रामी और दैशत फैलाने वाले डाकुओं ने आत्म समर्पण कर दिया था ! संत विनोवा भावे ने भी इस शुभ कार्य को अंजाम तक पहुंचाने में लोकनायक की बड़ी मदद की थी ! श्री जयप्रकाश नारायण जी समाजवाद के समर्थक सच्चे देश भक्त थे ! उस जमाने के त्रिमूर्ति जय प्रकाश नारायण, मनोहर लाल लोहिया और नरेंद्र देव विपक्ष में रहकर पंडित जवाहर लाल नेहरू की सरकार की योजनाओं का जो आम आदमी के हितों की रक्षा न करके बड़े घरानों के हितों की चिता करती थी, का घोर विरोध करते थे ! वे जनता से जुड़े असली नेता थे ! सन १९७७ ई० तक भ्रष्टाचार की भनक तो सुनने को मिलती थी लेकिन ८० प्रतिशत तक राजनीतिग्य, नौकरशाह ईमानदार थे ! हाँ पुलिस में घूसखोरी और रिश्वत खोरी की दो चार घटनाएं प्रकाश में आ जाती थी ! सन १९६२ ई० में रक्षा उपकरणों की खरीदारी में दलाली लेने का पहला केस प्रकाश में आया था, उस समय प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू और रक्षा मंत्री मेनन थे ! केस रफा दफा कर दिया गया था ! तश्कर, जमाखोर, मिलावट करने वाले, जुवारी, समाज को धर्म और उंच नीच की सीमाओं में बांटने वाले अपने पंख फैलाने लगे थे ! सन १९७५ ई० में इन्द्रा गांधी के प्रधान मंत्रित्व काल में देश में अमर्जेंसी लग गयी ! वह एक अन्धकार युग था, पुलिस और सरकार से जुड़े लोगों ने अपने विरोधियों को खूब सताया ! तमाम विपक्षी नेता जेलों में डाले गए ! सन १९७७ ई० के चुनाव ने कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा और जनता पार्टी के नाम पर
जिसको भी टिकट मिला चाहे वह डाकू-लुटेरा, तश्कर, जमाखोर था, सब जीत कर सांसद बन गए ! क़ानून तोड़ने वाले क़ानून बनाने वाले हो गए ! महंगाई बढ़ गयी, क़ानून व्यवस्था चरमराने लगी, पूरी जनता जनता पार्टी के राज में अपने को ठगा हुआ महसूस करने लगी ! वे इस गठ बंधन के आपसी झगड़े से परेशान हो गए ! हर सता से जुड़ने वाला अपनी मन मानी करने लगा ! सांसद और प्रदेशों में विधायक अपने गुंडे पालने लगे ! कल तक विहड़ों में छिपने फिरने वाले आज क़ानून गले में डाल कर भ्रष्टाचार जैसे अवैओध काम करने लगे, पहले छिप कर करते थे अब खुले आम करने लगे ! "जब सैंया कोतवाल तो डर काहे का" ! वही क़ानून बनाने वाले, कौन किसको पकड़ता ! फिर जनतापार्टी में प्रधान मंत्री की कुर्सी हथियाने के लिए फूट पड़ गयी और लोक नायक जयप्रकाश नारायण द्वारा सभी विपक्षी पार्टियों का गठ जोड़ नॉर्थ और साऊथ ब्लाक के चौराहे पर फूट गया ! सन १९८० ई० के मध्यावधी चुनाव में कांग्रेस बड़ी शक्ती शाली पार्टी बन कर फिर सतापर काविज हो गयी ! जनता ने सोचा कांग्रेस कितनी भी खराब क्यों न हो फिर भी इस जंगली राज से तो अच्छी ही है और इस बार फिर कांग्रेस की झोली वोटों से भर दी गयी ! कांग्रेस में भी परिवर्तन आगया और सच्चे ईमान दार सांसद विधायक किनारे कर दिए गए और पावरफूल, पुराने राज घराने , व्यापारी वर्ग के लोग, डाकू बाहुबली सता में आने लगे ! जनतापार्टी के हिस्टरी सीटर अपने गुंडों की फ़ौज के साथ आया राम गया राम बनकर सता पार्टी के साथ जुड़ने लगे ! भारतीय संविधान में एक सांसद या विधायक को भारत का नागरिक होना चाहिए, मानसिक तौर पर स्वस्थ होना चाहिए, १८ साल की उम्र वोट देने के लिए और २५ साल चुनाव लड़ने के लिए होनी चाहिए, बाकी कोई शर्त नहीं रखी गयी न शिक्षा का बंधन ही रखा गया, अंगूठा टेक मंत्री तक बन सकता है ! और इसी का फायदा उठाते हुए रौबदार, दभंग, ऊंची पहुँच वाले पैसे वाले लोग, दहशत फैलाने लोग संसद व विधान सभाओं में भरने लगे ! हर किसी को ऐश आराम की जिन्दगी जीने की इच्छा है, सैर सपाटे के लिए कीमती कार, विदेश यात्रा, बंगला, सुन्दर पार्क, कीमती फर्नीचर, इन सबके लिए पैसे चाहिए, अगर वेतन भता से पूर्ती नहीं होती तो ऊपर की कमाई का जरीया ढूँढा जाने लगा ! जनता के पैसों पर डाका पड़ने लगा ! इन्क्वारी बैठने लगी, लेकिन इन्क्वारी भी तो वही लोग कर रहे हैं जो भ्रष्टाचार के दल दल में स्वयं भी फंसे हुए हैं, फिर रिजल्ट क्या होगा ? कुछ दिन पहले एक खबर छपी थी की पी एम आफिस का एक यू डी सी ग्रेड का क्लर्क दो साल तक तीन ऐ ए एस अधिकारियों का वेतन भता लेता रहा, जो पी एम ऑफिस में डेपूटेशन पर आये थे और दो साल पहले ही अपने स्टेट को पोस्ट हो चुके थे ! क्लर्क पकड़ा गया था फिर क्या हुआ कोई जानकारी नहीं मिली ! क्या एक मामूली सा क्लर्क इतना पडा काण्ड कर सकता है वह भी लगातार दो साल तक और किसी की नजर में भी नहीं आया, जब की हर साल ऑडिटर आकर अकाऊनट्स का औडिट करते हैं ! अधिकारियों की सैलेरी सीधे बैंक अकाउंट में जाती है वहां से उनके अकाउंट्स से पैसे कैसे निकाले जाते रहे सबकी नज़रों के सामने ! इसी तरह हर मिनिस्ट्री में हो रहा होगा कौन पूछ रहा है ! एक एम पी या विधायक एक साल में ही करोड़ पति बन जाता है कैसे ? सी बी ऐ इन्क्वारी चलती है और अचानक बंद हो जाती है क्यों ? कहने का मतलब आज हिन्दुस्तान की मिट्टी का रंग भी भ्रष्टाचार के रंग में रंग गया है ! जहां भी खोदोगे भ्रष्टाचार की जड़ नजर आएगी !
हम कहते हैं हमारा देश आर्थिक दृष्टि से चीन को भी पीछे छोड़ देगा ! ऐसे भ्रष्टाचारी लोग क्या देश को आगे बढ़ने
देंगे ? आजकल चीन में एशियाड खेल हो रहे हैं, सब कुछ प्रोग्राम के मुताबिक़ हो रहा है, न कोई अफरा तफरी, न भाग दौड़ ! वहां भी औरगनाईजर घोटाला कर रहे होंगे लेकिन इस सीमा तक नहीं की मूल तो पूरा खा गए और ब्याज लगा दिया कामनवेल्थ गेम की तैय्यारियों में ! चीन, जापान, साऊथ कोरिया जैसे देश बिना किसी हूँ हां के एशियाड और ओलम्पिक बड़े आराम से सम्पन कर देते हैं और हमने केवल १९८२ के बाद एक कामनवेल्थ गेम औरग्नाईज किया और नतीजा सबके सामने है ! दुर्जन, भ्रष्टाचारी मजे में घूम रहे हैं और आम जनता इनके दुष्कर्मों के बोझ तले दबी जा रही है ! आएगा कभी कोई पालनहार इस देश को बचाने वाला इसी उम्मीद पर जी रहे हैं करोड़ों देश वासी आम आदमी का लवादा पहिनकर !

क्रिकेट के नीले आकाश में

आज भारत में अगर कोई खेल है तो वह क्रिकेट है ! भीड़ क्रिकेट में, पैसा क्रिकेट में, मनोरंजन क्रिकेट में और सबसे बड़ी बात फिक्सिंग भी क्रिकेट में ! पहले भारत के गाँव, नगर और शहरों में गुल्ली डंडा खेला जाता था , स्कूल के बच्चे, बुजुर्ग भी जब फुर्सत में होते थे गुल्ली-डंडा से सुस्ती भगाते थे ! अंग्रेज क्रिकेट को अपने साथ लाये और १९४७ ई० में स्वयं तो वापिस चले गए लेकिन बौल बैट को यहीं छोड़ गए ! अगर विश्व क्रिकेट के रिकार्ड पर नजर ड़ालें तो आप देखेंगे की सभी रिकार्ड्स होल्डर इंग्लैण्ड से बाहर के ही खिलाड़ी हैं ! बड़े बड़े नामी गरामी क्रिकेटियर वेष्ट इंडीज, (लारा, सोबर्स ), आस्ट्रेलिया, (ब्रेड मैन, उन्हें क्रिकेट का जनक कहा जाय तो भी कम है, ), श्री लंका ( मुरली थरण ८०० विकेट लेने वाला प्रथम बौलर), भारत (सचीन, कपिल, गावस्कर, अनिल कुम्बले) ! ये तो नामी गरामी नाम है जिन्होंने बैटिंग और बौलिंग में नाम कमाया है ! इसके अलावा क्रिकेट जगत में जो भी अंतर्राष्ट्रीय टेस्ट मैच, वन डे मैच या फिर केवल टी २० खेला है वह रातों रात करोडपति बन गया ! सचीन इमानदारी से अपना सालाना आयकर करोड़ों में देता है, उसी तरह गावस्कर, राहुल द्राविड और लक्षमण भी देता होगा ! अब वर्तमान भारतीय क्रिकेट टीम कैप्टेन महेंद्र सिंह धोनी की बात करें ! २००७ तक इनको शायद ही कोई जानता होगा ! द्राविड के कैप्टेन बनते ही उसे विकेट कीपर की पक्की जगह दे दी गयी जिस पर कैप्टेन बनने के बाद भी उसकी पक्की पकड़ है ! बैटिंग में सिक्स्सर लगाने और रनों का अम्बार लगाने पर पाकिस्तान के भूतपूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने इसे बधाई दी थी और उसके पीछे लटके बालों की भी सराहना की थी ! २००७ में पहले उसे टी २० का कैप्टेन बनाया गया, फिर वन डे का फिर फूल फ्लेज्ड भारतीय क्रिकेट टीम का कैप्टेन ! भारतीय क्रिकेट असोसियन विश्व का सबसे धनवान संस्था है ! खुद ही अनुमान लगाया जा सकता है की एक धनवान संस्था के टीम कैप्टेन की इनकम कीतनी होगी ? करोड़ों में या फिर अरबों में ! उसकी अगुवानी में भारतीय क्रिकेट टीम टेस्ट मैचों में विश्व स्तर पर पहली बार प्रथम पायदान पर पहुँची है ! लेकिन पिछले कुछ दिनों से इनकी बैटिंग स्पीड पर काली नजर लग गयी है, उन्हें ये नजर समय रहते झड़वा देनी चाहिए ! वैसे उनकी शादी साक्षी नाम की एक सालीन और सुन्दर लड़की से हुई है और शादी के बाद ही उनके बैट ने रन बटोरने कम कर दिए हैं ! आगे आगे देखिये होता है क्या ? लेकिन कहते हैं भाग्यवान के नक्षत्र जब गर्दीश में होते हैं तो अचानक ही कोई न कोई तारणहार निकल आता है और इसका जीता जागता उदाहरण सामने है, आस्ट्रेलिया के खिलाफ टेष्ट सीरीज जीताने में सचीन का योगदान तथा पुजारा (नया) और लक्षमण (पुराने चावल) की बैटिंग मददगार रही ! आजकल न्यूजी लैंड की टीम भारत आई है ! पहला टेस्ट हरभजन के समझ बूझ और ११५ रनों (पहली टेस्ट सेंचुरी) के कारण न्यूजी लैंड जीती बाजी हार गया ( एक बार तो केवल १५ रनों पर ५ भारतीय टापके खिलाड़ी पैविलियन लौट गए थे ) ! मुरलिथारण ने क्रिकेट से विदा लेते समय कहा था की आने वाले दिनों का हीरो भारतीय स्पिनर हरभजन बनेगा ! न्यूजीलैंड और भारत का दूसरा मैच १२ नवम्बर से शुरू हो गया है, न्यूजीलैंड ३५० और आज चौथे दिन के खेल ख़त्म होने पर २३७/४, भारत की और से हरभजन ने १११ (अविजित) ने फिर दूसरी सेंचरी लगाकर भारत को ४७२ तक पहुंचा दिया है और भारत को १२२ रनों की लीड दिला दी है ! (सहवाग ९६, गंभीर ५४, लक्षमण ७४, आखरी विकेट श्री शांत २४। उसने आखरी विकेट के लिए हरभजन के साथ मिलकर 105 रनों का योगदान देकर एक रिकार्ड कायम करदिया है ) ! लगता हैयह मैच भी बिना रिजल्ट के ड्राव रहेगा !

Tuesday, November 9, 2010

प्यार के अलग अलग रंग

दरिया और सरिता १२ वीं क्लास में साथ साथ पढ़ते थे ! सरिता तो पहले से ही फैजावाद केन्द्रीय विद्यालय में थी और दरिया का पिता सेना में हवलदार थे और उन्हीं दिनों आसाम से पोस्टिंग होकर फेमिली के साथ फैजाबाद आए थे ! क्योंकि दरिया आसाम में भी केन्द्रीय विद्यालय में पढ़ता था इस लिए यहाँ उसे केन्द्रीय विद्यालय में दाखिला आराम से मिल गया ! सरिता के पिता बनवारी लाल बचपन में ही अपने गाँव (हरियाणा) छोड़ कर यहाँ फैजाबाद आ गए थे ! पहले उन्होंने एक व्यापारी के यहाँ नौकरी की ! अपनी योग्यता, लगन, कठीन मेहनत और वफादारी से जिस सेठ के यहाँ वे नौकरी करते थे उन्होंने उसकी लगन, मेहनत और वफादारी से खुश होकर अपनी कंपनी में उसे २५% का हिस्सेदार बना दिया और अपनी लड़की की शादी उसके साथ कर दी ! सेठ जी की एक लड़की और एक लड़का था ! उनके स्वर्गवासी होने के बाद उनके वाणिज्य व्यापार का जिम्मा बनवारी लाल और उनके साले के कन्धों पर पड़ गया था ! सेठ जी अपनी वसीयत में दोनों को आधे आधे का हिस्सेदार बना गए थे ! दोनों ही मेहनती, कर्मठ और ईमानदार थे इसलिए व्यापार में दिन दुगुनी और रात चौगुनी उन्नति होती चली गयी व्यापार फैलता गया ! अब उनकी गिनती फैजाबाद में प्रतिष्ठित इज्जतदार नागरिकों में होने लगी ! कही स्कूल, अनाथालय, लावारिस बच्चों के होस्टलों में वे हर महीने डोनेशन देने लगे थे ! इधर दरिया एक फ़ौजी हवलदार का लड़का था ! उसके दादा भी सेना में हवलदार थे और उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में हिस्सा लिया था बर्मा बौडर पर ! रहने वाला वह भी हरियाणा का ही था, जाति विरादरी के हिसाब से भी दोनों खान दानी थे ! गाँव में जमीन भी थी और खाने के अलावा बेचने के लिए भी अनाज पैदा हो जाता था ! लेकिन आर्थिक दृष्टि से दोनों में जमीन आसमान का अंतर था ! इसलिए दरिया क्लास में अपनी पढाई पर ही विशेष ध्यान देता था, उसके अगल बगल में क्या हो रहा है, उसकी क्लास में कितनी लड़कियां पढ़ती हैं, कैसे लगती हैं, इस ओर उसने कभी ध्यान दिया ही नहीं ! उसने अपने पिता को सेना की ड्यूटी करते हुए देखा था, सुबह चार बजे से लेकर रात के दश बजे तक ! कभी कभी तो पूरी रात ही वे ड्यूटी पर रह जाते थे ! इस तरह कठीण मेहनत से कमाए हुए अपने पिता जी की कमाई से आये पैसों का वहा सही सदपयोग करना चाहता था ! मेहनत करता था और क्लास में प्रथम स्थान पाता था ! उसे तो यह भी पता नहीं था की जो इन्ने गिन्ने लड़कियां उसकी क्लास में पढ़ते हैं उनका नाम क्या है ! उसने सरिता का नाम तो सुना था पर देखा नहीं था ! वह एक अच्छी लड़की थी ! उसने कभी भी सो नहीं किया था की वह एक बड़े व्यापारी की लड़की है ! साधारण कपडे पहिनती थी और केवल अपनी पढाई से मतलब रखती थी ! मेहनत करती थी पर मैथ्स में कमजोर थी ! वह जानती थी की 'दरिया सारे बिषयों में होशियार है लेकिन मैथ्स में तो उसे महारत हासिल है' ! वह दरिया से मैथ्स सीखना चाहती थी लेकिन उसे बात करने की उसकी हिम्मत ही नहीं हुई ! समय निकलता जा रहा था, बोर्ड की परिक्षा की तारीखें नजदीक आ रही थीं ! आखिर हिम्मत करके एक दिन सरिता स्कूल की छुट्टी होने के बाद बाहर बरगद पेड़ के नीचे खड़े हो कर दरिया का इन्तजार करने लगी ! दरिया क्लास से सबसे बाद में निकलता था और सीधे बिना दांये बांये देखे अपने घर की तरफ चल देता था ! जैसे ही वह वरगद के पेड़ के नीचे से निकल रहा था उसे बीच रास्ते में सरिता दिखाई
दी ! दरिया को देखते ही सरिता ने उसका रास्ता रोकते हुए कहा, "माफ़ करना मैंने आज आपको बड़े विश्वास और भरोषे के साथ कुछ जिम्मेदारी देने के लिए रोका है, आशा है आप मेरे भरोषे का मान रखेंगे "! दरिया के पूछने पर उसने उससे मैथ्स सीखने की इच्छा जाहीर की ! दरिया ने उसे मैथ्स सिखाने की हामी भर दी ! दरिया ने उसे कहा की "मैथ्स तो मैं आपको सिखा दूंगा लेकिन कहाँ सिखाउंगा ?" , सरिता ने कहा "मेरे घर पर ! मैंने अपने मम्मी पापा से किसी अच्छे टीचर से मैथ्स सिखाने की इजाजत ले रखी है "! अगले दिन दरिया सरिता के साथ ही उसके घर गया ! सरिता के पापा और मम्मी से मिला ! उसके पापा ने कुछ जबाब सवाल करने के बाद उसे पूछा की वह ट्यूशन के कितने पैसे लेगा ! उसने जबाब दिया, "पढ़ाना मेरा शौक है पैसा कमाना नहीं, सरिता को मैथ्स पढ़ाते पढ़ाते मेरा भी तो रिविजन हो जाएगा "! जबाब सुनकर
बनवारी लाल खुश होगये और उन्होंने उसे सरिता को मैथ्स पढ़ाने की इजाजत दे दी ! इस पढ़ने पढ़ाने के दौरान कब इन दोनों की नजरें चार हुई और अन्दर ही अन्दर दिल के अन्दर कब प्रेम का पौधा अंकुरित हो गया दोनों को पता भी नहीं चला ! लेकिन विडम्बना तो देखिये, दिल की बात कभी इन दोनों की जवान पर नहीं आई ! वैसे भी दोनों की आर्थिक विषमताएं दोनों के दिल की आवाज दबा रही थी ! सरिता अपने मम्मी पापा से बाहर नहीं जा सकती थी, दरिया के पास पैसा नहीं था और वह किसी का मोहताज बनना नहीं चाहता था ! दोनों ही एक दूसरे को जीवन साथी बनाना तो चाहते थे लेकिन बात मन की मन में रह गयी और समय की गाडी बहुत आगे निकल गयी ! बोर्ड की परीक्षा भी हो गयी दोनों पास भी हो गए और आगे कालेज में दोनों की दिशाएं भी बदल गयी ! समय बहुत तेजी से निकलता चला गया ! सरिता के लिए अच्छे अच्छे रिश्ते आने लगे, लेकिन या तो परिवार ठीक नहीं मिला या लड़का सरिता के जोड़ का नहीं मिला ! सरिता के पापा ने एक दो बार दरिया के बारे में सोचा भी कि "दरिया एक सुन्दर कद काठी का मेहनतकस नव जवान है और सरिता के लिए योग्य भी है लेकिन गरीब है, एक मामूली सैनिक के लडके के हाथों अपनी फूलों की सेज में पली लाडली लड़की का हाथ दे देना कोई अकलबंदी नहीं है" ! उधर दरिया ने भी कालेज से निकलने के बाद अपने परिवार की परंपरा को आगे बढाते हुए आर्मी ज्वाइन करदी लेफ्टिनेंट की रैंक से ! पहली पोस्टिंग जम्मू काश्मीर में हुई कैप्टेन की रैंक के साथ ! वहां आतंकवादियों के एक भारी खतरनाक दल का सफाया करने के एवज में दरिया को केवल डेढ़ साल की सर्विस में ही पीस टाईम का दूसरे नंबर का मेडल 'कीर्ति चक्रा' भारत के राष्ट्रपति के हाथों से लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ ! देश के प्रमुख अखबारों के प्रथम पृष्ट पर उसकी फोटो के साथ उसकी बहादुरी के कारनामें उजागर किए गए थे ! राष्ट्रपति से मेडल लेते हुए उसकी सुन्दर तस्वीर भी अलग से छपी थी ! अखबार सरिता के ममी पापा ने भी देखा और सरिता ने भी ! फोटो देखते ही वे उसे पहिचान भी गए ! सरिता के लिए लड़का ढूंढते वक्त उन्हें उसकी याद नहीं आई क्योंकि उस समय तक वह उनकी बराबरी का नहीं था ! आज वही दरिया एक सेना का बहादूर अफसर 'कृति चक्रा ' से सम्मानित की वर्दी में उन्हें अपना दामाद नजर आने लगा ! सरिता को बिना कहे ही मन की मुराद मिल गयी, ईश्वर ने उसके दिल की पुकार सुन ली ! बनवारी लाल ने फ़ौरन अखबारों में छपे टेलेफोन पर दरिया के पिता से संपर्क किया और दरिया और सरिता का रिश्ता पक्का कर दिया गया ! इस तरह बिना ओंठ हिलाए ही दोनों की
मन की मुराद पूरी हो गयी, दोनों की शादी बड़े धूम धाम की गयी ! ये हैं प्यार के अलग अलग रंग !

Monday, November 8, 2010

आज तक क्या देखा और क्या सुना

आज ८ नवम्बर २०१० है ! इस बीच बहुत कुछ घट गया ! विश्व के नक़्शे पर नजर डालने पर पता चलता है कि ये दुनिया तो मिनिट मिनिट पर बदलती जा रही है ! कामनवेल्थ गेम आखीर भारत में हो ही गए ! सरकार ने दिल खोल कर आयोजकों को धन दिया कामनवेल्थ गेमों को सफल बनाने के लिए, आयोजकों ने भी बड़ी इमानदारी से ६५% अपनी जेबों में डाल कर बाकी के ३५ % लगा दिए, कुछ पुल गिर गए, कुछ मजदूर मर गए या घायल हो गए ! आम आदमी की जेब पहले भी खाली होती थी अब ७० हजार करोड़ की भरपाई के लिए सरकार ने मंहगाई बढ़ा दी ! ऊपर जनता के दबाव में आकर आयोजकों के ऊपर इन्क्वारी बिठा दी, इस पर भी तो पैसा लगेगा, इस से होने वाला तो कुछ नहीं है, जब पहले के घोटाला उजागर होने पर भी कुछ नहीं हुआ तो अब क्या होगा ! जनता तो बेचारी गऊ है गऊ भूखी प्यासी भी रहेगी फिर भी दूध देगी !
हमारे प्रधान मंत्री अभी हाल ही में चीन गए थे ! वहां के प्रधान मंत्री के साथ वार्ताएं चली ! सीमा पर जो विवाद उठा है, अरुणाचल प्रदेश पर भी चर्चा हुई, सन ६२ ई० में चीन ने जो भारतीय इलाका अपने कब्जे में कर लिया था शायद उस पर भी बात हुई होगी, नतीजा क्या निकला ? प्रधान मंत्री श्री मन मोहन सिंह खुद मानते हैं कि "चीन पर इतवार नहीं पर ६२ जैसा जंग नामुमकिन" ! यह तो पहले से ही पता था फिर चीन यात्रा की क्या जरूरत थी ?
अमेरिकी राष्ट्रपति भारत में
अमेरिका के प्रथम अश्वेत राष्ट्रपति श्री बराक ओबामा आज कल भारत की यात्रा पर हैं ! पहले वे मुम्बई में उतरे, वहां हवाई अड्डे पर महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति को एक ऐसी पुस्तक भेंट की जिसको वे अमेरिका के राष्ट्रपति भवन में सुरक्षित रखेंगे ! मुख्य मंत्री श्री अशोक चव्हाण जी ने यह पुस्तक उन्हें महाराष्ट्र की याद दिलाने के लिए दी है, भारत की याद दिलाने के लिए नहीं ! वैसे ओबामा का हवाई अड्डे पर उतरते ही भव्य स्वागत किया गया ! तथा पूरी मुम्बई में उनका स्वागत हुआ ! स्वागत समारोह एक स्कूल में हुआ था जहां बच्चों ने रंगा रंग प्रोग्राम में राष्ट्रपति ओबामा और उनकी पत्नी को भी डांस में शामिल कर दिया ! नन्ने नन्ने मासूम बच्चों ने जब विश्व के इस महान हस्ती को अपने साथ डांस करते पाया तो वे बहुत ही प्रशन्न हुए साथ ही बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ने भी इन मासूम बच्चों के बीच आकर मुम्बई के लोगों के दिलों में एक विशेष जगह बना दी एक अमिट छाप छोड़ दी ! कालेज के विद्यार्थियों से भी वे मिले और उनके सवालों के जबाब भी उन्होंने दिया ! दिल्ली आकर वे प्रधान मंत्री से मिले, संसद के दोनों सदनों को उन्होंने सम्भोधित किया ! जब उन्होंने हिन्दी में धन्यवाद कहा तो सारे सांसदों ने डेस्क बजाकर अपनी खुशी जाहीर की ! चाहे हमारे प्रधान मंत्री ने कभी एक भी शब्द हिन्दी में न बोला हो लेकिन डेस्क तो उन्होंने भी थप थपाई ! भारत को अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा से काफी अपेक्षाएं हैं ! उन्होंने विश्वास दिलाया है कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत का समर्थन करेगा ! भारत आज विश्व की एक उभरती हुई शक्ती है और अमेरिका - भारत की दोस्ती इस सदी की जरूरत है ! राष्ट्रपति और उनकी पत्नी भारत की सभ्यता, संस्कृति,
यहाँ की परम्पराएं, यहाँ की ऐतिहासिक सम्पदा से बहुत प्रभावित हुए हैं ! भारत के वैज्ञानिकों का वे बड़ा आदर करते हैं, उन्होंने कहा कि शून्य की खोज भारत ने की, सुपर कंप्यूटर भारतीयों ने बनाया ! किंग मार्टिन लूथर महात्मा गांघी के अहिंसा आन्दोलन के समर्थक थे ! भारत एक धर्म निरपेक्ष लोकतांत्रिक देश है, निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की ताकत है ! उन्होंने ने माना है कि पाकिस्तान के अन्दर आतंक वाद फल फूल रहा है ! और इसी आतंकवाद को समाप्त करने के लिए अमेरिका पाकिस्तान को आर्थिक सहायता दे रहा है ! पाकिस्तान के अन्दर आतंकी ठिकाने अमेरिका को मंजूर नहीं है, मुम्बई के हमलावरों को सजा मिलेगी ! उन्होंने विश्वास जताया है कि हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के संबंधन आपसी बातचीत से सुलझ जाएंगे ! साथ ही काश्मीरके बारे में उन्होंने कहा कि अमेरिका काश्मीर के मामले में दखलंदाजी नहीं करेगा ! हाँ अगर भारत - पाकिस्तान चाहेगा तो अमेरिका इस समस्या को सुलझाने में मदद कर सकता है !
भारत भी तो अमेरिका से कुछ चाहता है , यह - १बी और एल -१ बीजा शुल्क में कमी ! भारत की ऐ टी कंपनियों पर अमेरिका में लगी पावंदी हटाई जाय ! भारत के प्रधान मंत्री ने साफ़ कह दिया है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत और आतंकवाद साथ साथ नहीं चल सकता ! अभी भारत के प्रधान मंत्री मन मोहनसिंह और अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा के बीच वार्ता चल रही है ! जैसे ओबामा से पिछले अमेरिका के राष्ट्रपति क्लींटन ने यहाँ राजस्थान में यहाँ के लोगों पर अपने करिश्मा का जादू चलाया था ठीक वही करिश्मा ओबामा ने मुम्बई में बच्चों के बीच डांस करके दिखा दिया ! वैसे विशेषज्ञों का कहना है कि ओबामा भारत में अमेरिकियों के लिए नौकरी तलाशने के लिए आए हैं, वे यहाँ बिलियन डॉलर इन्वेस्ट करने जा रहे हैं ! जो भी होगा अच्छा ही होगा ! वैसे खुद अमेरिका में अमेरिका के न्यू डायनेमिक राष्ट्रपति बराक ओबामा का करिश्मा की सुई नीचे गिरने लग गयी है, उनकी पार्टी (डेमोक्रेटिव) प्रतिनिधि सभा (हॉउस ऑफ रिप्रेसेंटेटिव} में अल्पमत में आ गयी है और अभी उन्हें राष्ट्रपति की कुर्सी पर बैठे हुए दो साल भी पूरे नहीं हुए हैं !
टेस्ट क्रिकेट
आजकल न्यूजी लैंड की क्रिकेट टीम भारत आई हुई है ! पहला टेस्ट मैच जो ४ नवम्बर से ८ नवम्बर तक चला ड्राव रहा ! भारत ४८७+२६६ ( सहवाग १७३ + १, द्रविड़ १०४ +१, सचिन ४०+१२, लक्षमण ४०+९१, हरभजन ६९+११५ (पहला शतक), न्यूजीलैंड ४५९+२२/१ > रैना और धोनी सस्ते में निपट गए ! आज तक की खबरें ख़तम हुई !

Thursday, November 4, 2010

जिन्दगी को संवारने के लिए

हमारा यह शरीर पंच तत्व का है ! ईश्वर एक सुन्दर सी आकृति रूप में बच्चे को माँ बाप के आँगन में उतार देता है साथ ही उस बच्चे की देख रेख की भी जिम्मेदारी उनके कन्धों में डाल देता है ! अब माँ बाप जैसे माहौल में होंगे उसी तरीके से बच्चे की देख रेख, लालन पालन वे अपनी हैसियत से करते हैं ! यहाँ तक बच्चा अपने पिछले कर्म और संसकारों के सहारे पंहुचता है, अगर अच्छे कर्म थे तो किसी ऊंच्चे खानदान में, किसी ईश्वर भक्त के आँगन में, किसी सरस्वती की उपासना करने वाले सज्जन के घर में जन्म लेता है, नहीं तो किसी गरीब की झोपडी या किसी मजदूर की तपस्या से कमाई हुई पूंजी के तौर पर गुदड़ी का लाल बनकर उनके अतृप्त मन को तृप्त करने के लिए उनके घर का चिराग बन जाता है ! जब तक बच्चा होश संभालता है तब तक माँ बाप उसकी हर हरकत पर नजर रखते हैं ! उसके खान पान, रहन सहन और बोल चाल पर उसके माँ बाप की शिक्षा, सभ्यता और संस्कारों का असर पड़ता है ! ज्यों ज्यों वह बड़ा होता जाता है पास पडोस के बच्चों की संगत करता है, स्कूल जाता है वहां विभिन्न संस्कार और परस्थितियों से जूझते माँ बाप के बच्चे पढ़ते हैं, जिस बच्चे के विचारों से उसके विचार मेल खाते हैं, उस से उसकी दोस्ती हो जाती है ! अगर वह बच्चा संस्कारिक है, अच्छी सभ्यता वाला, अच्छी भाषा बोलने वाला है तो ये गुण उसके खान पान रहन सहन पर भी असर डालते हैं ! खान पान में पांच तत्वों की पूर्ती होती रहती है, इसी हिसाब से दिमाग बढ़ता है, शरीर बढ़ता है, पांच ज्ञान इन्द्रियाँ और पांच कर्म इन्द्रियों का विकास होने लगता है ! अगर माँ बाप का आँगन जो बच्चे की जिन्दगी की पहली सीढी है वही विकृत है, घर का माहौल ही दूषित है तो बच्चे का विकास भी वैसे ही होगा ! यहाँ पर सवाल उठता है की क्या बच्चे के संस्कार, खान पान पर और भाषा पर माँ बाप के गरीबी और अमीरी का असर पड़ता है ? अमीरी और गरीबी का असर तो बच्चे के खान पान रहन सहन, पहनावा और वातावरण पर पड़ता है लेकिन बुद्धी के विकास में अमीरी गरीबी आड़े नहीं आती ! माँ बाप गरीब हैं और अच्छे संस्कार और भाषा वाले हैं, महत्वाकांक्षी हैं, बच्चों के भविष्य के प्रति सजग हैं और लगनशील हैं उनके बच्चे झोपड़ियों से निकल कर बंगलों में पहुँच जाते हैं ! हाल ही में दो मजदूरों के बच्चे एक
ऐ ए एस में निकला है तो दूसरा ऐ ऐ टी के लिए क्वालीफाई कर गया है ! यह तो जीता जगता उदाहरण है ! फिर सभी अम्मीरों और नौकरसाहों के बच्चे ऊँची डिग्री नहीं ले पाते जो गरीबों के बच्चे ले जाते हैं ! हाँ राज नीति ही एक ऐसा स्थान है जहां सारी सीटें नेताओं और नौकरशाहों के लिए आरक्षित हैं !
अब रही इस पंच तत्व रूपी शरीर को संवारने की बात तो हर इंसान को जब वह स्वावलंबी हो जाता है तो उसे अपने शरीर का ध्यान स्वयं ही करना पड़ता है ! आज के इस मशीनी युग में जब इंसान भी खुद मशीन बन गया है, जिस शरीर को पुष्ट करने के लिए वह कमाने के लिए भाग दौड़ कर रहा है उसके बारे में सोचने का तो उसे कभी मौका ही नहीं मिलता ! आइए इस बारे में बात करें की हमारे इर्द गिर्द बिखरी हुई छोटी छोटी वस्तुएं, छोटी छोटी जानकारियाँ हमारी जिन्दगी को संवार सकती हैं ! सुबह उठते ही अपने हाथ देखिए, ठंडियों में हल्का सा गर्म पानी और गर्मियों में ठंडा पानी मुंह में भर दीजिये, ठन्डे पानी से आँखों में छूमा दीजिए तब तक, जब तक आँखों में मिर्च न लग जाँय ! फिर मुंह के पानी को नाक के द्वारा बाहर निकाल दीजिए ! इससे एक तो आँखों की रोशनी बनी रहती है चश्मे की जरूरत नहीं पड़ती, नाक का और गले का टेम्प्रेचर सम रहने से जुकाम लगने के चान्स्यज कम हो जाते हैं ! शाम को सोते हुए हलके गर्म दूध में एक चुटकी हल्दी डाल कर पी जाँय ! इससे पेट में पलने वाले परजीवी कीड़े ख़त्म हो जाते हैं ! ताली बजाने से शरीर के अन्दर के तमाम हिस्सों गुर्दे, फेफड़े, दिल, आंतें (छोटी बड़ी), गला, कान, आँखें, नाक, पेनक्रीज, थायराइड, लीवर को प्रेसर मिलता है ! शरीर को वार्म अप करने के लिए हल्का सा व्यायाम जरूरी है ! प्राणायाम जैसे अग्निसार, कपालभाती, अनुलोम -विलोम, उजई, भामरी, नाडी शोधन आदि ! इससे शरीर दिन भर चुस्त और प्रश्न्चित रहता है ! प्रसालन में परेशानी हो रही हो तो सुबह उठते ही दो गिलास गुनगुना पानी पीकर सौ दो सौ कदम चलिए, त्रिकोण आसन पांच बार बाएं और पांच बार दाहिने झुकिए ! अगर वायु की शिकायत है तो सुबह खाली पेट एक लहसुन छील कर साबुत पानी के साथ निगल जाँय ! मुंह का स्वाद ठीक नहीं है तो लंच या डिनर से दश मिनट पहले एक छोटा सा टुकड़ा अदरक का नमक मिलाकर चूस लें ! मुंह का स्वाद ठीक हो जाएगा और खाने में स्वाद आएगा ! इस तरह ईश्वर की दी गयी इस अमूल्य जिन्दगी को हम संवार सकते हैं और जितनी साँसे उस परम पिता ने हमें दे रखी हैं उनका आनंद ले सकते हैं !

Wednesday, November 3, 2010

एक नया सूरज निकलेगा

पुराना साल जाता है नया आता है, एक उत्साह, एक उमंग एक नया स्वप्न जहन में उतर आता है ! इसी तरह बीते दिन की खट्टी मीठी यादों को संजोकर नए दिन का इंतज़ार रहता है ! हर कोई उगते सूरज को नतमस्तक होकर नमस्कार करता है, लेकिन शाम को जब वही सूरज पश्चिम दिशा में अपनी लालिमा बिखेरते हुए अपनी अंतिम यात्रा की सूचना देता है तो कोई बिरले ही उनके दर्शन करता है ! जो दर्शन करते भी हैं वे शाम का नजारा देखना चाहते हैं की सूरज जब अस्ताचल को जाने लगता है तो कैसे लगता है ? कुछ सैलानी सूरज की अंतिम यात्रा में कुदरत के अद्भूत रंग देखते हैं कुछ ऐसी भी दिल वाले होते हैं जो सूर्यास्त की सीनरी को अपने बैठक की दीवार पर लगा कर बैठक की शोभा बढाते हैं !
आज मैं सुबह सुबह पूरब दिशा में खुलने वाली अपने घर की खिड़की के पास बैठकर उगते सूरज के दर्शन कर रहा था ! जहां पर सूरज उगने वाले थे वहा कुछ दूर तक काले बादलों की परतें जमा थी ! धीरे धीरे सूरज की किरणे बिखरती गयी और ये बादलों के टूकडे किरणों के प्रभाव में स्वरूप बदलते गए ! मैं एक टक से पूरी एकाग्रता से बादलों के पल पल में बदलते हुए रूप रंग देखता रहा ! पहले लगा की मेरे सामने एक विशाल पर्वत खडा है, उस पर्वत के आगे खेत हैं, कहीं कहीं पर बड़ी बड़ी झीलें झीलों में खिले हुए कमल के फूल, विचरण करने वाली बतखें, खेत धान की पक्की हुई फसलों से भरी हुई, उनके बीच से निकलता हुआ रास्ता जो पहाड़ की चोटी तक चला गया है ! पहाड़ के पीछे से एक नदी बहती हुई, पर्वत शिखर से झरना बन कर गिरती है और इन खेतों की मीढों से टकराती हुई आगे विशाल झील में मिल जाती है ! इस नदी के किनारे कही प्रकार के पेड़ पौधे कही रंगों में दिखाई दे रहे हैं ! जैसे जैसे सूरज का रथ आगे बढ़ता है वैसे ही इन बादलों का स्वरूप भी बदलता जाता है ! धान के विशाल खेत धीरे धीरे सूखे घास में बदल जाते हैं ! झीलें धीरे धीरे सिकुड़ती हुई सूखती जा रही हैं ! उगते हुए सूरज की चढ़ती हुई किरणें काले बादलों को छितर बित्तर करती हुई चारों और फैलती जा रही हैं ! सूरज पूरी तरह निकल आये हैं और बादल जो उनके रथ के आगे दुष्टों की तरह जाल बिछाते जा रहे थे दूम दबाकर भागते नजर आ रहे हैं जैसे सच्चाई के आगे झूठ फ़िका पड़ जाता है, जैसे सज्जनों के आगे दुष्ट ज्यादा देर नहीं टिक पाते ठीक वैसे ही आज के भ्रष्टाचारी, जालिम, दुष्ट, अत्याचारी, हत्यारे और झूठे सूरज की तेज किरणों में जल कर राख हो जाएंगे ! भारत भूमि में भी एक दिन एक ऐसे ही सूरज निकलेगा जिसकी तेज किरणों के आगे ये तमाम भ्रष्टाचारी,
रिश्वत खोर, जमाखोर, देश द्रोही, गद्दार, आतंकवादी, हत्यारे, झूठे, सब्ज बाजार दिखाने वाले आयाराम गया राम नेता इन काले बादलों की तरह बिखर जाएंगे ! इसी आशा और विश्वास के साथ भारत माता की धुल धूसरित करोड़ों किसान, सैनिक, मजदूर, मासूम बच्चे, महिलाएं जी रहें हैं और इन्तजार कर रहे हैं उस भगवान कृष्ण की जिन्होंने स्वयं अपने मुंह से कहा था "यदा यदा हि धर्मंस्य ग्लानिर्भ व् ति भारता, अभ्युत्थानम धर्मस्य तदाअत्मानं सृजाम्यहम !!