Friday, December 2, 2011

चौदहवीं का चाँद

कभी "चौदहवीं का चाँद हो, या आफ ताव हो, खुदा की कसम तुम लाजवाब हो !" यह गाना हिन्दुस्तान की गली गलियों में सुनाई देता था ! मुझे भी यह गाना बहुत पसंद था ! जब भी शुक्ल पक्ष का चौदवीं का चाँद स्वच्छ नील गगन में नजर आत़ा था तो मैं बहुत देर तक एक टक चाँद को देखा करता था और उन कवियों, संगीतकारों की कलम को जिन्होंने हसीन और सुन्दर नारी की तुलना चाँद से करके चाँद को ही सुन्दरता का प्रतीक बना दिया है, नमन करने का मन करता है ! वो दिन भी क्या दिन थे, जब कोई यह भी नहीं जानता था की प्रदूषण किस चिड़िया का नाम है, खुला आसमान होता था, नील गगन में चमकते और मुस्कराते हुए असंख्य सितारे नजर आते थे और लार्ड टेनिसन जैसे कवियों को अपनी कविता लिखने के लिए आमंत्रित करते थे ! "टविन्किल टविन्किल लिटल स्टार हाउ आई वंडर ह्वाट यू आर " ! इनके बीच बड़े सज धज कर अपनी मुस्कान और प्रकाश फैलाते हुए चाँद नजर आते थे ! सितारों में उत्तर दिशा में अटल एक स्थान पर ध्रूब तारा और उसके चारों तरफ चक्कर लगाते हुए सप्त ऋषि मंडल साफ़ स्वच्छ तन मन को शांती का सन्देश देते हुए नजर आते थे ! पुराणों में अंकित है की किस प्रकार देवासुर संग्राम को समाप्त करने के लिए विष्णु ने देवताओं और असुरों को समुन्द्र मंथन के लिए तैयार कर लिया था ! शेष नाग की रस्सी और मंदराचल पर्वत का मुशल बनाकर समुद्र मंथन किया गया, वहां
से १४ रत्न प्राप्त हुए ! शंक, चक्र, गदा पद्म और लक्ष्मी तो विष्णु भगवान ने ग्रहण कर लिया ! अमृत - देवताओं में बांटा गया ! राहू ने देवता बनकर अमृत ग्रहण कर लिया साथ ही सर कटवा लिया ! राहू से राहू और केतु बन गया ! जहर का प्याला शंकर जी ने ग्रहण किया और नील कंठ नाम धराया ! ऐरावत हाथी इंद्र ने ले लिया ! भूरिश्रवा घोड़ा असुरों के गुरु शुक्र को मिला ! कल्प वृक्ष, कामधेनु गाय, सूर्य और चंद्रमां इस तरह चौदह रत्नों में चंद्रमां विष की बहिन भी कही जाती है ! लेकिन नील गगन में अँधेरे में प्रकाशित होने वाला चाँद, कविवों की रस भरी और अलंकारों से सुसजित कविता चंद्रमां को अपना प्रेरणा स्रोत बनाकर लिखी गयी कविता, चकोर जिसको निहारता हुआ अपनी सुध बुध भी भूल जाता है ! चन्द्र मुखी नाम देकर किसी सुंदर बाला के सौन्दर्य को निखारने वाला चाँद,
आज कहाँ गया वो चाँद ! धूल के आवरण से ढका हुआ चाँद, प्रदूषण से घिरा हुआ चाँद, धरती के मनुष्यों द्वारा बार बार पद दलित हुआ चंद्रमा, आज आहत पड़ा है !
इधर अमेरिका में आते ही चाँद फिर से खिल खिलाने लगता है ! वहीं कवियों का चौदहवीं का चाँद अमेरिका में मुस्कराता है ! मैंने आखिर पूछ ही लिया चाँद से की भारत में तो तुम धूल के हलके आवरण में लिपटी सिमटी सिमटी सी चिता ग्रस्त नजर आते हो और अमेरिका में आते ही उस आवरण को फेंक कर मुस्कराते हो, इसका क्या कारण है, बड़े मायूस होकर चाँद ने कहा, "ये धूल का आवरण मनुष्य की सौगात है, जो भारत के लोगों ने हिमालय पर्वत के ऊंचे ऊंचे शिखरों पर जाकर, निर्मल अविरल धारा से बहने वाली पवित्र नदियों, झरनों, तालाबों में गन्दगी गिरा कर, जंगलों के पेड़ पौधों को काट कर कुदरत की सुन्दरता को कुरूप बना दिया है ! ऐसा नहीं है की अमेरिका में प्रदूषण नहीं है लेकिन यहाँ, नदियाँ , जंगल, सड़कें साफ़ सुथरी हैं ! हर इंसान अपने कर्तव्यों के प्रति सचेत है ! यहाँ तक की जंगलों में भी जहा बड़ी संख्या में लोग हाईकिंग के लिए जाते हैं वहां भी साफ़ सफाई नजर आती है !
समुद्र में भी प्रदूषित वस्तुवों का निषेध है ! जहां का नील गगन साफ़ और स्वच्छ है, वहां मुस्कराते हुए और खिलखिलाते हुए चहल कदमी करने का मजा ही और है ! जाओ भारत में भी गंगा यमुना और उन सारी नदियों की सफाई कर डालो जिनको तुमने अपने स्वार्थ सिधी के लिए गन्दगी से भर कर नालों में तब्दील कर दिया है ! हिमालय पर्वत श्रेणियों की सफेदी को बरकरार रखने के लिए वहां डाले गए कूड़े कर कट को हटा दो ! भारत को एक बार फिर उसी तरह स्वच्छ और सुन्दर बना दो जिसके लिए भारत विश्व में पहिचाना जाता था ! फिर देखना मैं हिन्दुस्तान की सर जमीन पर किस तरह खिल खिलाउंगा और जी भर के मुस्कराउंगा ! क्या भारतीय सरकार ये सब कुछ कर पाएगी ?

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