Tuesday, November 22, 2011

क्या पाकिस्तान एक निकम्मा पड़ोसी है

हाँ पाकिस्तान एक ऐसा पड़ोसी है जो खुद तो शांती से जीना नहीं चाहता पर पड़ोसी भारत की शान्ति को भी भंग करने की कोशीश करता रहता है ! १४ अगस्त १९४७ को जैसे ही भारत से अलग पाकिस्तान एक नया देश अस्तित्व में आया, उसी दिन से इसके हुक्मरानों ने अपनी जनता की भलाई की जगह भारत के अन्दुरुनी मामलों में दखलंदाजी करनी शुरू करदी ! जिन्ना संयुक्त भारत का प्रधान मंत्री बनना चाहता था और अगर उसे प्रधान मंत्री बना दिया जाता तो शायद पाकिस्तान तो नहीं बनता लेकिन पूरा भारत का क्या होता, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती ! देश की जनता उस समय के लौह पुरुष बल्लभ भाई पटेल को भारत का प्रथम प्रधान मंत्री देखना चाहती थी लेकिन बने जवाहर लाल नेहरू ! पाकिस्तान को भारतीय नेताओं ने बंटवारे में उसके हिस्से में जो कुछ आता था उसको तो दिया ही साथ ही पाकिस्तानी जनता के विकास कार्यों के लिए उसे पचास करोड़ रुपये और दे दिए गए ! पाकिस्तान ने इन्हीं पैसों से विदेशों से खतरनाक हथियार खरीदे और मुजाहिदीन बनकर पाकिस्तानी सेना ने काश्मीर पर अटैक कर दिया ! उस समय जम्मू काश्मीर के शासक थे महाराजा हरिसिंह ! ये एक दुर्भाग्य ही था की तब तक महाराजा हरिसिंह ने जम्मू काश्मीर को भारत में विलय करने के सहमती पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए थे । और इसी का फायदा उठाया पाकिस्तान ने ! जल्दी जल्दी में जम्मू और काश्मीर राज्य को भारतीय संघ में विलय की औपचारिका निभाई गयी ! भारतीय सेना को जनरल (उस समय वे मेंजर जनरल थे) के एस थिमैया के नेत्रित्व में काश्मीर भेजा गया ! उस समय तक पाकिस्तान काश्मीर के बहुत सारे इलाकों को विजित कर चुका था ! पाकिस्तान की सेना नए हथियारों से लैश थे, दूसरी तरफ भारत अपने घिसे पिटे हथियारों से ही लड़ रहे थे ! लेकिन ये भारतीय वीर, वफादार और देश भक्त सैनिक थे ! जल्दी ही पाकिस्तानी सेना को हर मोर्चे पर मात खानी पडी वे पीछे हटते गए और हमारे सैनिक पोस्टों पर पोस्ट वापिस लेते रहे ! जब जीतने के लिए केवल तीसरा हिस्सा बाकी रह गया तो उसी समय दिल्ली से जनरल साहेब को सीज फायर करने का आदेश मिला ! आदेश की तामील की गयी ! और तभी से पाकिस्तान काश्मीर के साथ साथ सीमाओं पर अपने किराए के सैनिकों द्वारा दैशत फैलाता रहा है ! आमने सामने की लड़ाई में तो वह कभी भारत का सामना नहीं कर पाया, १९६५, १९७१, १९९९ (कारगिल वार) में बुरी तरह परास्त होने के वावजूद वह अपने शैतानी कारनामों से बाज नहीं आ रहा है ! वैसे आजादी के बाद पाकिस्तान को फ़ौजी हुकमरानों ने अपने लोहे के पंजों से दबाए रखा ! उनकी गुप्त सुरक्षा एजेंसी आई एस आई सरकार पर भारी पड रही है ! आई एस आई आतंकवादियों को बढ़ावा दे रही है ! पाकिस्तान के गली कुचों में आतंकवादियों को परिशिक्षित किया जा रहा है ! भारत के महा नगरों में जाकर बम धमाके कराके दहशत फैलाते हैं ! पाकिस्तान का विकास तो हो नहीं रहा है उलटा भारत के विकास कार्यों में भी रुकावटें खडी कर रहा है ! सही बात तो यह है की पाकिस्तान का अपना कुछ भी नहीं है ! धन अमेरिका का, शासन व्यवस्था फौजियों के हाथ में ! हथियार अम्युनिशन सब आतंकियों के हाथ में है ! जनता बेचारी, बेकारी, मंहगाई, बीमारी, भ्रष्टाचार, रिश्वत खोरी से तंग है, नेता भारत की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा रहे हैं आतंकी उन हाथों को ही काट रहे हैं ! दिल्ली, मुम्बई में ह्त्या काण्ड करवा के अब आतंकी पाकिस्तान में ही दैशत गर्दी फैला रहे हैं ! निर्दोष वहां भी मारे जा रहे हैं ! पाकिस्तान द्वारा पोषित आतंकी अब पाकिस्तान के लिए भश्मासूर बन गए हैं !
भश्मासुर नाम का एक बहुत भयानक, दुर्दांत शैतान राक्षस था, उसने अमर होने के लिए शिव भगवान् की अस्तुति की ! भगवान शिव जल्दी ही प्रशन्न हो जाते हैं, उन्होंने उसे वर माँगने को कहा, उसने माँगा "मेरे आराध्य देव अगर आप सच मुच में मेरे ऊपर प्रशन्न हैं तो, मुझे ऐसी अमोघ शक्ती दो की मैं जिसके सर पर हाथ रख दूँ वह जल कर राख हो जाए !" भगवान् आशुतोष ने तथास्त कह दिया ! वरदान का फल जानने के लिए उसने अपना हाथ शंकर जी के सर पर ही रखना चाहा ! यह देख कर शंकर भगवान को अन्तर्धान हो कर जान बचानी पडी ! आज यही दशा पाकिस्तान की भी है, आतंकवादी अब अपने पालन पोषण करने वालों पर ही अपना निशाना शाध रहे है !
इस तरह न पाकिस्तान सुख शांति से रह रहा है न पड़ोसी को शांती की सांस लेने दे रहा है !

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