Sunday, October 18, 2009

दिवाली

दिवाली दिलों को जोड़ने वाली दीपो का त्यौहार है ! कहते हैं त्रेता में जब भगवान राम चन्द्र जी १४ साल के बाद अयोध्या लौट ही ही ही रहे थे तो अयोध्या वासियों ने भगवान् राम चन्द्र जी के स्वागत के लिए पूरी अयोध्या को दीप माला से सजा दिया था ! मार्ग के दोनों तरफ़ जग मग करते दीपो की पंक्तियाँ सजाई गयी थी, रास्तों में थे बिरंगे फूल बिछाए गए थे ! भगवान राम जब जंगल गए थे तो संन्यासियों का भेष बना कर गए थे ! पावों में एक मात्र खडाऊ थे उन्हें भी भरत जी अपने सर पर रख कर वापिस ले आए थे ! वे उस दिन नंगे पाँव ही अयोध्या आ रहे थे ! उस दिन अमावस्या थी और चारों ओर अँधेरा था और इस अन्धकार को झिलमिलाती रोशनी में परिवर्तित करन के लिए अयोध्या वासियों ने दीपकों की रोशनी का वह शमा बाँधा की इन्द्र लोक की शोभा भी फीकी पड़ गयी ! उस जगमगाती रोशनी में भगवान् राम भार्या जानकी और छोटा भ्राता लक्षमण के साथ अयोध्या लौटे थे ! वे सारे देश वासियों से गले मिले थे ! सारे गिलवे शिकवे दूर हुए हंसी खुशी का नया दौर शुरू हुआ था ! और भारतीय संस्कृति में यह दिन दीपावली के नाम से प्रसिद्द हुआ !
दीपावली हंसी खुशी दिलों का मेल और दीपो की जगमग जगमग करती दीपो की रोशनी का नाम है ! १५ अगस्त १९४७ में भारत आजाद हुआ और आज भी इस दिन लालकिला और राष्ट्रपति भवन दीप मालाओं से सजाया जाता है ! फ़िर ये बम पटाके बीच में कौन ले आया ! इन बम पटाकों से कुछ लोग तो खुश हो लेते हैं लेकिन इसके दूषित प्रयावरण से देश की जनता को जो स्वास्थ्य संबन्धी हानि होती है उसका खामियाजा तो आम जनता को ही भोगना पङता है ! आज इन बम पटाकों के डर से आम आदमी राष्ट्रपति भवन की जगमगाती दिवाली को देखने की हिम्मत नईं जुटा पाता है ! क्या सरकार इन बम पटाकों पर रोक लगा पाएगी और दीपावली के त्यौहार की हंसी खुशी दिल दिलों के मेल को लौटा पाएगी ?
हरेन्द्र सिंह रावत

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