Tuesday, June 15, 2010

मेरी छटी अमेरिका यात्रा

मैं अपनी पत्नी के साथ छटी बार अमेरिका आया हूँ ! ब्रिटिश एयर वेज से टिकिट राजेश ने पहले ही बुक कर दी थी ! समय और दिन -रविवार - सोमवार १३/१४ जून २०१० रातके २.१५ पर जहाज को दिल्ली की जमीन से ऊंचाई नापनी शुरू कर देनी थी ! दो घंटे पहले एयर पोर्ट पहुंचना था ! घर पर मेरा १६ महीने का पोता आर्नव मेरे से चिपका हुआ था, शायद उसको भी पता चल गया था की दादा और दाद्दी कहीं जाने तैय्यारी कर रहे हैं ! जब बिंदु उसे मेरी गोदी से उठा कर ले जाने लगी वह बहुत रोया था ! बच्चों को आर्शिया, आर्नव और शोभा का बेटा श्रे को प्यार देकर ब्रिजेश और शोभा के साथ हम दोनों एयर पोर्ट के लिए चल पड़े ! १२ बजे एयर पोर्ट पंहुच गए थे, ब्रिजेश और शोभा भारी मन से वापिस गए और हम दोनों सुरक्षा पंक्ती से पासपोर्ट और टिकेट चेक करवा कर एयर पोर्ट के अन्दर दाखिल हुए ! ब्रिटिश एयरवेज के काउंटर से बोर्डिंग पास लिया और तीन बैग जहाज में बुक करवा दिए, तीन हलके हैण्ड बैग अपने साथ रख लिए ! सुरक्षा कर्मियों ने भी चटकी दिखाते हुए पूरी चेक्किंग की और हम निश्चिन्त होकर गेट नंबर ८ पर जहाज में बैठने के लिए इन्तजार करने लगे ! सबसे पहले क्लास वन, फिर बिजिनिस क्लास वालों का नंबर आया, उसके बाद बच्चे वाले और अपंग लोगों को सहायता देकर जहाज में बैठाया ! फिर सिलसिलेवार सीट नंबर के हिसाब से हम लोग भी अपनी सीटों की तरफ आगे बढ़ने लगे ! जहाज परिचायकाएं हमें सही स्थान पहुंचाने में मदद कर रही थी ! आखिर कार हम दोनों ने भी अपनी सीट नंबर ३६ ए, बी पर कब्जा जमा ही लिया ! जहाज ने ठीक टाईम पर उड़ान भरी और ऊंचाइयां नापते हुए ३८००० फिर ४०००० फीट पर उड़ने लगा ! यहाँ टेम्परेचर -५०, ५२ डिग्री था ! जहाज में ही कम्बल रखे थे यात्रियों ने ओढ़ लिए ! हर सीट पर टी वी सेट थे, अपनी मर्जी की पिक्चर देखी ! परिचायाकाएं काफी हंस मुख और हर यात्री की मांग पर ध्यान दे रही थी ! खाना आया, जूस चाय, काफी कुछ भी डिमांड कर लो मिलेगा, यहाँ तक ड्रिंक भी पर बीयर आदि एक सीमा तक ! सीटें काफी आराम दायक थी, ८ घंटे की थकाने वाली यात्रा ! आखिर लन्दन के हीथ्रो पर जहाज रुका ६.२३ पर ! यहाँ बदली करनी थी, अमेरिकेन एयरवेज तक जाने में काफी समय लगा ! पहले ट्रेन, फिर बस की यात्रा फिर जाकर टर्मिनल थ्री आया ! यहाँ भी गेट नंबर ४२ तक जाने में काफी समय लगा, फिर सिक्यूरिटी चेकिंग ! साढ़े आठ बजे फ्लाईट नंबर ए ए ११५ ने उड़ान भरी ! हमारी सीट नंबर २४ ग, फ थी ! इसमें भी सीटें काफी आराम दायक थी ! कुछ सीटें खाली होने से यात्री और भी आराम से सोने का उप क्रम कर रहे थे ! कुछ ही देर में जहाज ३६००० फीट की ऊंचाइयां नापने लगा ! जहाज और अटलांटिक महासागर के बीच बादल आगये थे ! लन्दन से और न्यू यार्क की दूरी ३००० किलोमीटर के लगभग है और ये पूरी दूरी अटलांटिक महासागर के ऊपर से ही तय करनी होती है ! खाना नान विज तथा विज दोनों प्रकार का था ! इतना स्वादिष्ट तो नहीं था जितना ब्रिटिश एयर वेज में था फिर भी अच्छा था ! परिचारिकाएँ पढी लिखी स्मार्ट अनुशासित और हंस मुख थी लेकिन उनमें भी करेन नाम की एक परिचारिका बहुत सुन्दर खूब हँसने और हंसाने वाली थी ! स्वभाव और दिल की बहुत ही अच्छी थी ! मैं ने उससे एक बीयर की डिमांड कर दी, उसने ६ डौलर डेबिट कार्ड से मांगे ! मैंने कहा "मैडम मैं कैश दे सकता हूँ, मेरे पास डेबिट कार्ड नहीं है, मेरी डिमांड कैंसिल कर दें !" करेन ने वीयर की बोतल मुझे देते हुए कहा "यह मेरी तरफ से " और मैंने उसे धन्यवाद देते हुए बोतल लेली ! शायद ऐसा व्यवहार हमें हमारे देश की परिचारिकाओं से न मिल पाए ! अमेरिका के लोकल टाईम के मुताबिक़ प्लेन ११.२१ पर जौहन कैनेडी एयर पोर्ट पर उतर गया था पूरे १० घंटे बाद ! फॉर्म सही न होने की वजह से सुरक्षा काउंटर पर कुछ देर लग गयी ! जब बैगेज लेने आए तो पता लगा की हमारा एक बैग गुम है ! आफिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई और एयर पोर्ट से बाहर आगये ! यहाँ भी सही गेट पर न आकर हम लोग सीधे कार पार्किंग में पहुँच गए ! यहाँ मैंने एक अमेरिकन सजन से सही गेट तक पहुचाने का आग्रह किया और वह साथ चलने लगा, ठीक इसी समय मेरा लड़का राजेश पोता वेदांत के साथ वहीं पर आगया, मजे की बात यह थी की राजेश ने कार वहीं पर पार्किंग कर रखी थी ! साढ़े बारह बजे हम लोग अपने अमेरिकन ठिकाने १६६ ब्रेटल सर्कल मेलविल लौंग ऐलैंड न्यू यार्क पहुंचे, यहाँ बहु काजल, पोता आत्रेय धेवता करण इंतज़ार कर रहे थे ! इस तरह यात्रा का पहला सोपान सम्पूर्ण हुआ ! अगले ही दिन यानी १५ जून को हमारा खोया युआ बैग भी घर पहुँच गया था !

3 comments:

  1. नमस्ते,

    आपका बलोग पढकर अच्चा लगा । आपके चिट्ठों को इंडलि में शामिल करने से अन्य कयी चिट्ठाकारों के सम्पर्क में आने की सम्भावना ज़्यादा हैं । एक बार इंडलि देखने से आपको भी यकीन हो जायेगा ।

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  2. Rawat Saheb,
    Namaskar,
    Aap ki sukhad Yatra ka vivran padhkar bahut prsannta huyi aur main yah samachar sabhi garden ghumnewale saathiyon tak pahuchaunga aap kripya thodi si wahan ki thandhak apne mail ke madhyam se bhej dijiye taki ham sukun ki sans le saken, aapke is blog ke liye badhayi main jab aap mujhe khabar denge main jarur padhkar apni pratikriya ya aalochna jo bhi thik lagega jarur post karunga, bas yun hi likhte rahiye hamara gyanwardhan karte rahiye aapke joke hame sada aapki anupasthiti me bhi hasate rahte hain Dhanyawad.
    A K Dubey, Dwarka Delhi

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  3. मन को भाया आपका लेखन

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