Friday, August 6, 2010

रूस्तम और सोहराव

रूस्तम और सोहराब का किस्सा कभी बचपन में स्कूली किताबों में पढ़ा था, लेकिन इसकी और गहराई में जाना चाहता था की आखिर वो कौन सी मजबूरी थी की एक बुजुर्ग को एक जवानी की सीढ़ियों पर चढ़ते हुए सुकुमार पर बेरहमी पर धोखे से कटार का वार करना पडा और उसके बार बार पूछने के बावजूद कि "आप रूस्तम तो
नहीं हैं " ? लेकिन रूस्तम ने सोहराब के प्रशन्न को ही सोहराब की चाल समझी और बिलकुल इनकार कर दिया की वह रूस्तम है ! वैसे भी उस जमाने में रूस्तम पहलवानों का सिरमौर था ! उसके साथ आमने सामने दो दो हाथ करने की कल्पना से ही बड़े बड़े पहलवानों के पसीने निकल आते थे ! फिर सोहराब अभी १६-१७ साल का किशोर, जिस्मानी ताकत में फूर्ती, चौकनापन, पहलवानी के दाव, रूस्तम पर भारी पड़ रहे थे, रूस्तम को लगा की अगर मैं असली रूस्तम इस बालक से हार गया तो, रूस्तम का नाम तो बच जाएगा इस हारने की जिल्लत से, इसलिए उसने रूस्तम होने से इनकार कर दिया ! उधर सोहराब को उस रूस्तम में पता नहीं क्यों ऐसा लग रहा था कि वह ही उसका पिता रुस्तम है, उसकी पकड़ रूस्तम पर ढीली पड़ती जा रही थी ! उसकी माँ ने कहा था, बेटा अपना भेद की "तू सोहाराब 'रूस्तम' का बेटा है", किसी पर मत खोलना ! इसलिए अपना भेद खोलने से पहले वह यकीन करना चाहता था की 'यह शख्स जिससे मैं इस अखाड़े में लड़ रहा हूँ मेरा अपना पिता है, लेकिन उसका बाप उसकी तड़प को नहीं भांप पाया और अपनी सौहरत, अपने टाईटल को बचाने के लिए उसने उसकी सुस्ती का फायदा उठाया और सोहाराब को धोके से कटार घोंप दी ! मरते मरते बेटे ने बाप को कहा, "तुमने मुझे धोके से मारा है, जब मेरा पिता रूस्तम सुनेगा की तुमने मुझे धोखे से मारा है तो तुम्हे ज़िंदा नहीं छोड़ेगा ! रुस्तम ने जब उसके बाजू में बंधी निशानी देखी जो उसने उसकी माँ को दी थी, तो उसके होश उड़ गए, लेकिन अबतो पक्षी पिंजरा छोड़ कर ऊंचे नील गगन में जाकर नज़रों से ओझल हो चुका था ! कितना ददर्नाक घटना थी ये न केवल माँ-बाप के लिए बल्की पढ़ने वालों के लिए भी !

4 comments:

  1. बहुत दर्दनाक कहानी है .. धन , पद और यश की लोलुपता सबकुछ करा सकती है !!

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  2. उफ़्………………इतना भयानक्………………रोंगटे खडे हो गये……………बेहद मार्मिक और दिल दहला देने वाली कहानी।

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  3. THANK YOU SO MACH MAM MENE YAH KAHANI 10 CLass me padi thi ap bilive nani karogi muje wo dino ki yaad dilakar .......................

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  4. बेहद दिल-ख़राश कहानी है,,,,
    एक बूढ़े-बाप के हाथो से अनजाने में अपने जवान बेटे का क़त्ल होना,,
    और बाद में उस ही बूढ़े बाप के कांधों पे अपने जवान बेटे की लाश उठाना,,,,
    सोचकर ही दिल काँप जाता है,,,

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